पटना, 7 नवंबर 2026 : बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड (JDU) में चल रही खींचतान के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद अरुण कुमार ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अनंत सिंह के निष्कासन को सही बताते हुए कहा है कि उनके पुराने योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। वहीं, निशांत कुमार को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी देने और नीरज कुमार को कम बोलने की सलाह भी दी है। JDU की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। एमएलसी चुनाव के दौरान शुरू हुई खींचतान और नेताओं के बीच बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। अरुण कुमार ने माना कि एमएलसी चुनाव में पार्टी और एनडीए के भीतर गुटबाजी हुई थी। उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं होता तो एनडीए सभी आठ सीटें जीत सकता था। अरुण कुमार ने कहा कि पार्टी की अनुशासन समिति ने जो फैसला लिया, वह अपने स्तर पर सही है, मगर अनंत सिंह के पुराने योगदान को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने निशांत कुमार को पार्टी का नेतृत्व सौंपने, असंतुष्ट नेताओं से संवाद बढ़ाने और एमएलसी नीरज कुमार को विशेष रूप से संयम बरतने की सलाह दी है।

अनंत सिंह को JDU में मिलेगा एक और मौका ?

मोकामा विधायक अनंत सिंह को जेडीयू ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। एमएलसी चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था। इस पर अरुण कुमार ने कहा कि पार्टी की अनुशासन समिति ने अपने स्तर पर सही फैसला लिया है। किसी व्यक्ति को पार्टी से ऊपर नहीं माना जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अनंत सिंह का जेडीयू में पुराना योगदान रहा है। किसी एक मुद्दे के आधार पर उनके पूरे राजनीतिक योगदान को खारिज नहीं किया जाना चाहिए। अरुण कुमार के मुताबिक अनंत सिंह के मामले की समीक्षा होनी चाहिए और उन्हें वक्त दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज नहीं तो कल उनकी क्षमताओं का इस्तेमाल करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। उनके इस बयान से अनंत सिंह की भविष्य में जेडीयू में वापसी की संभावनाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, अरुण कुमार ने उनकी वापसी की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

गुटबाजी नहीं होती तो एनडीए जीतता सभी आठ एमएलसी सीटें

अरुण कुमार ने बिहार एमएलसी चुनाव में एनडीए के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर गुटबाजी हुई थी। उनके मुताबिक, जिन सीटों पर एनडीए को हार मिली, उनमें से कई सीटें ऐसी थीं जिन्हें आसानी से जीता जा सकता था। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी और गठबंधन के भीतर गुटबाजी नहीं होती तो एनडीए सभी आठ सीटों पर जीत दर्ज कर सकता था। एमएलसी चुनाव में जेडीयू के भीतर अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद सामने आया था। इसके बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने भी हार के लिए अंदरूनी खींचतान को जिम्मेदार ठहराया था।

निशांत कुमार को मिलनी चाहिए पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी

जेडीयू में भविष्य के नेतृत्व को लेकर अरुण कुमार ने निशांत कुमार के पक्ष में खुलकर बात रखी। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार को पार्टी का नेतृत्व करना चाहिए और उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। इसके लिए किसी संवैधानिक या सरकारी पद की जरूरत नहीं है। अरुण कुमार ने कहा कि निशांत को खुद आगे आकर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करना चाहिए। उनके मुताबिक, पार्टी में जो लोग असंतुष्ट हैं या जिनके मन में नाराजगी है, उनकी बात भी निशांत कुमार तक पहुंचनी चाहिए। संगठन की समस्याओं का समाधान, पार्टी का विस्तार और भविष्य की रणनीति बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी हमेशा केवल औपचारिक पदों के आधार पर नहीं चलती। कई बार नेतृत्व का वास्तविक आधार किसी नेता की राजनीतिक स्वीकार्यता और संगठन पर पकड़ होती है।

नीरज कुमार को अरुण कुमार ने दी कम बोलने की सलाह

जेडीयू नेता नीरज कुमार के बयानों पर भी अरुण कुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नीरज कुमार को कम बोलने और राजनीतिक जीवन में संयम बरतने की सलाह दी। अरुण कुमार ने कहा कि नीरज कुमार उनके छोटे भाई की तरह हैं और चुनाव जीतकर आए हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में शादी का उदाहरण देते हुए कहा कि दूल्हे को थोड़ा संयम रखना चाहिए, क्योंकि उसके आसपास मौजूद लोग भी उसकी बातों और व्यवहार पर नजर रखते हैं। उनका इशारा नीरज कुमार की लगातार बयानबाजी की ओर था।

JDU में आगे क्या होगा ?

अरुण कुमार के बयान से जेडीयू की अंदरूनी राजनीति के तीन अहम संकेत सामने आए हैं। अनंत सिंह के निष्कासन के बावजूद उनके पुराने योगदान को लेकर पार्टी में पुनर्विचार की गुंजाइश हो सकती है।निशांत कुमार को संगठन में बड़ी भूमिका देने की मांग पार्टी के भीतर उठ रही है। एमएलसी चुनाव में हार के पीछे गुटबाजी को जिम्मेदार मानने वाले नेताओं की संख्या बढ़ रही है। हालांकि अनंत सिंह की जेडीयू में वापसी, निशांत कुमार को नई जिम्मेदारी और पार्टी के भीतर गुटबाजी खत्म करने को लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।