पटना, 7 नवंबर 2026 : बिहार की राजनीति में जेडीयू के भीतर गुटबाजी और टूट की अटकलों के बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एक बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की राजनीतिक पारी खत्म होने के बाद जेडीयू का एक राजनीतिक दल के रूप में कोई लंबा भविष्य नहीं है। उनका दावा है कि पार्टी के नेता आने वाले समय में बीजेपी, जन सुराज और दूसरे दलों में जा सकते हैं। इस तरह जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भविष्य को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एमएलसी चुनाव के बाद पार्टी के भीतर गुटबाजी और नेताओं के बीच बढ़ते मतभेद की चर्चा हो रही है। प्रशांत किशोर का कहना है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक पारी का अंत होने के बाद जेडीयू एक राजनीतिक दल के रूप में ज्यादा समय तक अस्तित्व में नहीं रह पाएगी। बिहार में जेडीयू के दो गुटों में बंटने की अटकलों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पार्टी कितने गुटों में बंटेगी, यह तो वह नहीं बता सकते हैं, मगर एक राजनीतिक दल के रूप में उसका भविष्य उन्हें नजर नहीं आता है। उनके इस बयान से बिहार की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है।

नीतीश कुमार का व्यक्तित्व ही थी JDU की सबसे बड़ी ताकत

प्रशांत किशोर ने जेडीयू के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी की पहचान और ताकत नीतीश कुमार के व्यक्तित्व और उनके काम से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि जब जेडीयू सत्ता में थी, तब नीतीश कुमार ही पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा थे। पार्टी की राजनीति और संगठन में उनका व्यक्तित्व प्रभावी रहा। प्रशांत किशोर के मुताबिक, जेडीयू का राजनीतिक आधार काफी हद तक नीतीश कुमार के नेतृत्व पर निर्भर रहा है। ऐसे में उनके सक्रिय राजनीति से हटने के बाद पार्टी के सामने नेतृत्व का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी चुनाव से पहले भी यह मानती रही है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक पारी खत्म होने के साथ ही जेडीयू का भविष्य कमजोर पड़ जाएगा।

JDU में अब न कोई नेता, न नेतृत्व और न नीति : प्रशांत किशोर

जन सुराज प्रमुख ने जेडीयू के मौजूदा नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के बिना पार्टी में न कोई ऐसा नेता दिखाई देता है, जो पूरे संगठन को एकजुट रख सके, न मजबूत नेतृत्व है और न ही कोई स्पष्ट राजनीतिक नीति। प्रशांत किशोर के मुताबिक, फिलहाल जेडीयू सत्ता में है, इसलिए एक राजनीतिक दल के रूप में उसकी पहचान बनी हुई है। लेकिन आने वाले समय में पार्टी धीरे-धीरे अलग-अलग हिस्सों में बंट सकती है। उन्होंने दावा किया कि जेडीयू का संगठन धीरे-धीरे कमजोर होगा और पार्टी खंड-खंड होकर खत्म हो सकती है। हालांकि, यह प्रशांत किशोर का राजनीतिक आकलन है। जेडीयू की ओर से पार्टी के भविष्य को लेकर ऐसा कोई फैसला या बयान सामने नहीं आया है।

JDU के नेता BJP और जन सुराज में जाएंगे : PK

प्रशांत किशोर ने जेडीयू के नेताओं के भविष्य को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पार्टी के कुछ नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जा सकते हैं, जबकि कुछ नेता जन सुराज का दामन थाम सकते हैं। इसके अलावा जेडीयू के कुछ नेता दूसरे राजनीतिक दलों में भी शामिल हो सकते हैं। प्रशांत किशोर के मुताबिक, नीतीश कुमार के बाद जेडीयू के नेताओं के सामने अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की चुनौती होगी। ऐसे में अलग-अलग नेता अपने राजनीतिक भविष्य के हिसाब से दूसरे दलों का रुख कर सकते हैं।

JDU में गुटबाजी के बीच बढ़ी सियासी हलचल

दरअसल, बिहार एमएलसी चुनाव के बाद से जेडीयू के भीतर मतभेद की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। मोकामा विधायक अनंत सिंह और जेडीयू नेता नीरज कुमार के बीच विवाद के बाद पार्टी ने अनंत सिंह को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। वहीं, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की पार्टी की अहम बैठकों से गैरमौजूदगी और कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के साथ उनके कथित मतभेदों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। जेडीयू के वरिष्ठ नेता अरुण कुमार ने भी एमएलसी चुनाव में गुटबाजी को हार की बड़ी वजह बताया है। उन्होंने कहा था कि अगर गठबंधन और पार्टी के भीतर गुटबाजी नहीं होती तो एनडीए सभी आठ सीटें जीत सकता था। इसी बीच प्रशांत किशोर का यह बयान जेडीयू के राजनीतिक भविष्य को लेकर जारी बहस को और तेज कर सकता है।

क्या नीतीश कुमार के बिना बिखर जाएगी JDU?

प्रशांत किशोर के बयान का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यही है कि जेडीयू की असली परीक्षा नीतीश कुमार के सक्रिय नेतृत्व से हटने के बाद होगी।

पार्टी के सामने आने वाले समय में कई चुनौतियां हो सकती हैं :

नेतृत्व का सवाल : नीतीश कुमार के बाद पार्टी की कमान किसके हाथ में होगी?

गुटबाजी पर नियंत्रण : क्या संजय झा, ललन सिंह और दूसरे वरिष्ठ नेता एकजुट रह पाएंगे?

निशांत कुमार की भूमिका : क्या नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पार्टी को नया नेतृत्व दे पाएंगे?

राजनीतिक अस्तित्व : क्या जेडीयू अपनी अलग पहचान बनाए रखेगी या उसके नेता दूसरे दलों में चले जाएंगे? फिलहाल जेडीयू के टूटने या खत्म होने को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं है। लेकिन प्रशांत किशोर की भविष्यवाणी ने बिहार की राजनीति में एक नया सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि नीतीश कुमार के बाद जेडीयू की कमान और राजनीतिक पहचान किसके हाथ में होगी।