पटना, 7 नवंबर 2026 : बिहार की सियासत में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर खींचतान की चर्चा तेज है। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की पार्टी की अहम बैठकों से गैरमौजूदगी, संजय झा के साथ बढ़ते मतभेद और विधायकों की गोलबंदी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की राय अलग-अलग है, मगर फिलहाल पार्टी टूटने की कोई घोषणा नहीं हुई है। बिहार की राजनीति में इन दिनों जेडीयू के भीतर चल रही गतिविधियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या छठ पर्व के बाद जेडीयू में कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा ? क्या केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं? क्या संजय झा और ललन सिंह के बीच खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है ? इन चर्चाओं को हवा तब मिली, जब ललन सिंह जेडीयू की बैठक में शामिल नहीं हुए। इससे पहले भी पार्टी के विधायकों और विधान पार्षदों की प्रबोधन बैठक में उनकी गैरमौजूदगी पर सवाल उठे थे। वहीं, पटना स्नातक सीट के एमएलसी चुनाव में पार्टी में मतभेद सामने आए। ललन सिंह ने पार्टी के प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए, जबकि नीरज कुमार ने उनके खिलाफ नाराजगी जाहिर की। रिपोर्ट के मुताबिक, जेडीयू में संजय झा और ललन सिंह के बीच आपसी खींचतान की चर्चा है।

1. प्रबोधन बैठक में ललन सिंह को नहीं बुलाने पर उठे सवाल

जेडीयू के भीतर गुटबाजी की चर्चा उस समय तेज हुई, जब पार्टी के 85 विधायकों के लिए प्रबोधन बैठक आयोजित की गई। इसका उद्देश्य विधायकों को सदन विधानमंडल की कार्यवाही और सदन से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी देना था। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह शामिल नहीं हुए। उनकी गैरमौजूदगी पर कुछ विधायकों ने सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक नचिकेता मंडल, शालिनी मिश्रा, रामानंद मंडल, मीना कामत, पंकज मिश्रा और मंजीत सिंह समेत कई विधायकों ने ललन सिंह को नहीं बुलाए जाने पर अपनी बात रखी। हालांकि पार्टी की ओर से कहा गया था कि यह कार्यक्रम विधायकों के लिए था और सांसदों को आमंत्रित नहीं किया गया था। इसके बावजूद ललन सिंह की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर उनके राजनीतिक महत्व और नेतृत्व के साथ रिश्तों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

2. एमएलसी चुनाव में नीरज कुमार और ललन सिंह के बीच बढ़ा विवाद

जेडीयू में मतभेद का दूसरा बड़ा कारण पटना स्नातक सीट का एमएलसी चुनाव बना। इस चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ विधायक अनंत सिंह ने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया था। ललन सिंह ने अनंत सिंह की ओर से नीरज कुमार पर लगाए गए आरोपों को सही बताते हुए प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि पार्टी के प्रदेश नेतृत्व से गलती हुई है। इसके बाद जेडीयू के भीतर दो नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे। चुनाव जीतने के बाद नीरज कुमार ने ललन सिंह से दूरी दिखाई। उन्होंने ललन सिंह से मुलाकात करने और उनका आशीर्वाद लेने से इनकार कर दिया था। नीरज कुमार ने यह भी कहा था कि चुनाव के दौरान उन्हें जिन परेशानियों का सामना करना पड़ा, उसका जवाब राजनीतिक तरीके से दिया जाएगा। इस घटनाक्रम से पार्टी में ललन सिंह और संजय झा के नेतृत्व वाले खेमे के बीच मतभेद की चर्चा बढ़ी।

3. बीजेपी कार्यालय में ललन सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस से बढ़ी चर्चा

अक्टूबर में ललन सिंह बीजेपी कार्यालय पहुंचे थे। वहां उन्होंने बीजेपी नेताओं के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा था। हालांकि, कार्यक्रम का विषय कांग्रेस और राहुल गांधी से जुड़ा था, मगर जेडीयू के नेता का बीजेपी कार्यालय में संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस करना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। इस घटनाक्रम को जेडीयू के भीतर अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों के तौर पर देखा गया।

4. संजय झा और ललन सिंह के बीच क्यों बढ़ी दूरी ?

जेडीयू में नीतीश कुमार के बाद संगठन के भीतर संजय झा और ललन सिंह दोनों की अहम भूमिका रही है। संजय झा पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जबकि ललन सिंह केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। एमएलसी चुनाव के दौरान नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी ललन सिंह को दी गई थी। पर विवाद खत्म नहीं हुआ और नीरज कुमार ने ललन सिंह पर नाराजगी जाहिर की। इसके बाद पार्टी में नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर अलग-अलग विचार सामने आए। जेडीयू के भीतर संजय झा और ललन सिंह के बीच शीतयुद्ध जैसी स्थिति की चर्चा है।

5. क्या बीजेपी जेडीयू को टूटने देगी ?

जेडीयू की अंदरूनी खींचतान के बीच बीजेपी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दोनों दल बिहार में एनडीए के सहयोगी हैं। जेडीयू में गुटबाजी की एक वजह मजबूत नेतृत्व और आपसी समन्वय की कमी है। उनका मानना है कि फिलहाल पार्टी में टूट की स्थिति नहीं दिखती। उनके मुताबिक, बीजेपी भी नहीं चाहेगी कि जेडीयू में कोई टूट हो, क्योंकि इसका असर एनडीए की राजनीति और दूसरे राज्यों में गठबंधन के समीकरणों पर पड़ सकता है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू में आपसी संवाद की कमी और गुटबाजी पार्टी के राजनीतिक अस्तित्व के लिए चुनौती बन सकती है। उनके मुताबिक, ललन सिंह फिलहाल पार्टी में हाशिये पर दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह अपनी राजनीतिक भूमिका को लेकर आगे क्या रुख अपनाते हैं।

नीतीश कुमार की भूमिका और निशांत कुमार का बढ़ता महत्व

जेडीयू की अंदरूनी राजनीति में एक और अहम पहलू निशांत कुमार की भूमिका है। नीतीश कुमार के बेटे निशांत को पार्टी के भविष्य के चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है। जून 2026 में पार्टी की बैठक में कई नेताओं ने निशांत कुमार को पार्टी का भविष्य बताया था। सितंबर में विधायकों की प्रबोधन बैठक में भी उन्होंने संबोधन दिया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के भीतर निशांत कुमार की भूमिका और भविष्य के नेतृत्व को लेकर चर्चा जारी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी में नेतृत्व की नई व्यवस्था बनने के दौरान पुराने नेताओं के बीच प्रभाव और जिम्मेदारी को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं ?

छठ के बाद जेडीयू में क्या हो सकता है ?

फिलहाल जेडीयू में गुटबाजी और नेताओं के बीच मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन पार्टी टूटने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

आने वाले दिनों में तीन बातें महत्वपूर्ण रहेंगी :

ललन सिंह का अगला कदम : क्या वह पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेंगे या अपनी राजनीतिक रणनीति अलग रखेंगे ?

संजय झा और ललन सिंह के रिश्ते : क्या दोनों नेताओं के बीच मतभेद दूर करने की पहल होगी?

नीतीश कुमार की भूमिका: क्या नीतीश कुमार पार्टी के अलग-अलग गुटों के बीच समन्वय स्थापित करेंगे? छठ के बाद जेडीयू की राजनीति में क्या बदलाव आता है, इस पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल पार्टी में टूट की चर्चा राजनीतिक अटकलों तक सीमित है। इसका जवाब आने वाले दिनों में नेताओं के रुख और संगठनात्मक फैसलों से ही मिलेगा।