गुमला | 08 जुलाई 2026
झारखंड के गुमला जिले से सामने आई एक तस्वीर ने ग्रामीण पेयजल व्यवस्था और सरकारी योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के बिंदोरा पंचायत स्थित एक दलित बस्ती में करीब 24 से 25 परिवार आज भी स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए उसी गड्ढे का पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जहां आसपास के मवेशी भी पानी पीते हैं। बारिश के दौरान गड्ढों में जमा होने वाला मटमैला पानी ही इन परिवारों का सहारा बन जाता है।
एक किलोमीटर दूर से पानी लाने की मजबूरी
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश नहीं होने पर महिलाओं को प्रतिदिन लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित छोटे तालाब (डोढ़ा) से पानी लाना पड़ता है। गर्मी के मौसम में जलस्रोत सूख जाने पर स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। पानी की कमी के कारण पूरे गांव में रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है।
वर्षों से बंद पड़ी सरकारी जलमीनार
ग्रामीणों के अनुसार, पेयजल समस्या के समाधान के लिए वर्षों पहले सरकारी जलमीनार का निर्माण कराया गया था, लेकिन तकनीकी खराबी और रखरखाव के अभाव में वह लंबे समय से बंद पड़ी है। कई बार पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
जलजनित बीमारियों का बढ़ा खतरा
दूषित जल के लगातार उपयोग से गांव में जलजनित बीमारियों का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वच्छ पानी नहीं मिलने के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जल्द से जल्द पेयजल व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने बंद पड़ी जलमीनार की मरम्मत, नए चापाकलों की स्थापना, जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन से पेयजल आपूर्ति और आवश्यकता पड़ने पर टैंकर के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की मांग की है। प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।




