नई दिल्ली, 18 सितंबर। पूरे हफ्ते ऑफिस, ट्रैवल, मीटिंग और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने के बाद कई लोगों को वीकेंड पर बाहर घूमने के बजाय घर में रहना ज्यादा अच्छा लगता है। कोई देर तक सोना चाहता है, कोई फिल्म या सीरीज देखना पसंद करता है, तो कोई खाना बनाने, गार्डनिंग या अपने पसंदीदा काम में समय बिताता है। मनोविज्ञान के नजरिए से घर पर रहना हमेशा आलस नहीं होता। कई बार यह शरीर और दिमाग को आराम देने का एक स्वाभाविक तरीका हो सकता है।