नई दिल्ली, 23 अगस्त। प्रेग्नेंसी से पहले मौजूद लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर नई रिसर्च में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। The Lancet Public Health में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं में प्रेग्नेंसी शुरू होने से पहले एक से अधिक दीर्घकालिक शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं थीं, उनमें कुछ गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ा हुआ देखा गया। यह अध्ययन किंग्स कॉलेज लंदन समेत कई संस्थानों के शोधकर्ताओं ने किया और इसमें 2000 से 2022 के बीच चारों UK देशों के 22 लाख से अधिक प्रेग्नेंसी और बर्थ रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया।
मिसकैरेज का जोखिम करीब 20 प्रतिशत ज्यादा
शोधकर्ताओं के अनुसार, एक से अधिक लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य समस्याओं के साथ प्रेग्नेंसी शुरू करने वाली महिलाओं में बिना किसी ऐसी बीमारी वाली महिलाओं की तुलना में मिसकैरेज का जोखिम करीब 20 प्रतिशत अधिक पाया गया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पहले से बीमारी होने पर मिसकैरेज होना तय है। रिसर्च जोखिम के स्तर में अंतर दिखाती है, किसी एक महिला के निश्चित परिणाम की भविष्यवाणी नहीं करती।
तेज उल्टी और प्री-एक्लेम्पसिया का जोखिम भी बढ़ा
स्टडी में गंभीर मितली और उल्टी की समस्या का जोखिम करीब 69 प्रतिशत अधिक पाया गया। वहीं, प्री-एक्लेम्पसिया का जोखिम करीब 42 प्रतिशत अधिक था। प्री-एक्लेम्पसिया प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी गंभीर स्थिति है, जिसके लिए नियमित मेडिकल मॉनिटरिंग जरूरी होती है।
ज्यादा बीमारियां होने पर खतरा और बढ़ सकता है
रिसर्च में पाया गया कि स्वास्थ्य समस्याओं की संख्या बढ़ने के साथ कुछ जोखिम भी बढ़ते गए। तीन या उससे अधिक दीर्घकालिक स्थितियों वाली महिलाओं में नसों में खून का थक्का बनने यानी venous thromboembolism का जोखिम बिना ऐसी स्थितियों वाली महिलाओं की तुलना में साढ़े तीन गुने से अधिक था। anxiety और depression का जोखिम भी कई स्थितियों वाली महिलाओं में अधिक पाया गया।
प्रेग्नेंसी में लापरवाही से बचना जरूरी
अगर किसी महिला को प्रेग्नेंसी से पहले कोई पुरानी बीमारी है, तो डॉक्टर से प्री-कॉन्सेप्शन सलाह लेना और दवाओं की समीक्षा कराना महत्वपूर्ण है। प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद या शुरू न करें। बहुत ज्यादा उल्टी, तेज सिरदर्द, नजर धुंधली होना, अचानक सूजन, सांस लेने में परेशानी, तेज पेट दर्द या ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। यह स्टडी जोखिमों को समझने में मदद करती है, डर पैदा करने के लिए नहीं।




