नई दिल्ली, 20 सितंबर। गमले में लगे पौधों की मिट्टी पानी देने के कुछ ही समय बाद सूखी दिखाई देने लगे तो हर बार ज्यादा पानी डालना सही तरीका नहीं है। मिट्टी का प्रकार, तेज धूप, गमले का आकार और पानी देने का तरीका इसकी वजह हो सकते हैं। कुछ आसान उपायों की मदद से मिट्टी में नमी ज्यादा समय तक बनाए रखी जा सकती है और पौधे को जरूरत के मुताबिक पानी भी मिल सकता है।

सबसे पहले मिट्टी की गुणवत्ता जांचें

अगर मिट्टी बहुत ज्यादा रेतीली या ढीली है, तो पानी जल्दी नीचे निकल सकता है और नमी कम समय तक टिकती है। ऐसी स्थिति में अच्छी तरह तैयार कंपोस्ट या जैविक खाद मिलाने से मिट्टी की संरचना बेहतर करने में मदद मिल सकती है। इससे मिट्टी पानी को कुछ देर तक रोक पाने में सक्षम हो सकती है।

ऊपर से सूखी मिट्टी देखकर तुरंत पानी न दें

गमले की ऊपरी परत सूखी दिख रही हो तो जरूरी नहीं कि अंदर की मिट्टी भी सूखी हो। पानी देने से पहले उंगली से करीब 1-2 इंच नीचे की मिट्टी जांचें। अगर अंदर भी सूखापन महसूस हो, तभी पानी देने की जरूरत हो सकती है।

मिट्टी के ऊपर मल्च की हल्की परत लगाएं

सूखे पत्ते, नारियल के छिलके के छोटे टुकड़े या उपयुक्त जैविक सामग्री की हल्की परत मिट्टी की सतह पर बिछाई जा सकती है। इसे मल्चिंग कहा जाता है। इससे मिट्टी से पानी के बहुत तेजी से वाष्पित होने को कम करने में मदद मिल सकती है। मल्च को पौधे के तने से थोड़ा दूर रखें।

पौधे को बहुत तेज धूप से बचाएं

पूरे दिन तेज धूप में रखा गमला जल्दी सूख सकता है। पौधे की जरूरत के अनुसार ऐसी जगह चुनें जहां पर्याप्त रोशनी मिले, लेकिन गर्मी और सीधी धूप जरूरत से ज्यादा न हो। हर पौधे की रोशनी की जरूरत अलग होती है।

पानी देने का तरीका भी सही रखें

रोज थोड़ा-थोड़ा पानी देने के बजाय जरूरत के अनुसार अच्छी तरह पानी देना बेहतर हो सकता है। पानी इतना दें कि गमले के नीचे बने ड्रेनेज होल से थोड़ा पानी बाहर निकल जाए। इसके बाद अगली सिंचाई मिट्टी की नमी देखकर करें।

ड्रेनेज होल जरूर चेक करें

गमले के नीचे के छेद बंद होने पर पानी जमा हो सकता है, जिससे जड़ों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। सही ड्रेनेज जरूरी है ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके।

हर पौधे की जरूरत अलग होती है

कुछ पौधों को ज्यादा नमी चाहिए, जबकि कुछ कम पानी में भी अच्छी तरह बढ़ते हैं। इसलिए पौधे की किस्म, मौसम, गमले का आकार और मिट्टी की स्थिति देखकर पानी देने की आदत बनाएं। इससे मिट्टी में नमी का संतुलन बनाए रखना आसान होगा।