रांची | 9 जुलाई 2026

झारखंड कैडर की 2000 बैच की आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई हैं। मनरेगा और माइनिंग लीज से जुड़े कथित घोटालों में गिरफ्तारी और लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब उनकी सचिव पद पर तैनाती को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार की मंशा पर निशाना साधा है।

21 साल की उम्र में बनी थीं सबसे कम उम्र की IAS अधिकारियों में शामिल

पूजा सिंघल ने महज 21 वर्ष की उम्र में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में ऑल इंडिया 10वीं रैंक हासिल कर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया था। उन्हें देश की सबसे कम उम्र की सफल आईएएस अधिकारियों में गिना जाता है। शुरुआती वर्षों में उनकी पहचान एक तेज-तर्रार अधिकारी के रूप में रही, लेकिन वर्ष 2022 में उनका नाम कथित मनरेगा और माइनिंग लीज घोटाले में सामने आने के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं।

ईडी की कार्रवाई और करोड़ों की संपत्ति का मामला

साल 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूजा सिंघल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने उनके और उनसे जुड़े परिसरों पर छापेमारी के दौरान करीब 36 करोड़ रुपये नकद तथा लगभग 82 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए थे। इस कार्रवाई ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था।

दो साल से अधिक जेल, फिर मिली जमानत

गिरफ्तारी के बाद पूजा सिंघल करीब दो वर्ष चार महीने तक न्यायिक हिरासत में रहीं। वर्ष 2024 में उन्हें अदालत से जमानत मिलने के बाद उनकी सेवा बहाल कर दी गई। वर्तमान में वह झारखंड सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एवं ई-गवर्नेंस विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। साथ ही उन्हें झारखंड कम्युनिकेशन नेटवर्क लिमिटेड (JCNL) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

बाबूलाल मरांडी ने सरकार को घेरा

पूजा सिंघल की वर्तमान नियुक्ति को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस अधिकारी का मामला कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का प्रतीक बताया गया था, आज उसी अधिकारी की सरकार के शीर्ष स्तर पर मौजूदगी कई सवाल खड़े करती है। मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ पूजा सिंघल की मौजूदगी का जिक्र करते हुए सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति पर भी टिप्पणी की।

राजनीतिक बहस तेज, सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

पूजा सिंघल की नियुक्ति के बाद झारखंड में एक बार फिर प्रशासनिक जवाबदेही, भ्रष्टाचार के मामलों और सरकारी नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेर रहा है, जबकि सरकार की ओर से इस पूरे विवाद पर फिलहाल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।