बिहार में फैल रहा सूखे नशे का जाल, रोकथाम में प्रशासन भी नाकाम; युवाओं में तेजी से बढ़ रही लत•पटना में प्रबुद्ध सम्मेलन, शिवराज सिंह चौहान बोले—मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर •रौशन आनंद को मिली जमानत, भाई प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार में होंगे शामिल•India Marks First Anniversary of Pahalgam Terror Attack; PM Modi Vows 'We Will Never Bow to Terror'•बिहार में फैल रहा सूखे नशे का जाल, रोकथाम में प्रशासन भी नाकाम; युवाओं में तेजी से बढ़ रही लत•पटना में प्रबुद्ध सम्मेलन, शिवराज सिंह चौहान बोले—मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर •रौशन आनंद को मिली जमानत, भाई प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार में होंगे शामिल•India Marks First Anniversary of Pahalgam Terror Attack; PM Modi Vows 'We Will Never Bow to Terror'•
'वंदे मातरम्' का अपमान अब पड़ेगा भारी! रास से विधेयक पास, जानिए क्या होगी सजा | Diarch News
'वंदे मातरम्' का अपमान अब पड़ेगा भारी! रास से विधेयक पास, जानिए क्या होगी सजा
राज्यसभा ने राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। अब 'वंदे मातरम्' का अपमान या उसके गायन में बाधा डालना दंडनीय अपराध होगा। जानिए नए कानून में क्या-क्या प्रावधान हैं।
Sapna Kashyap
1 व्यू
Share
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026: राज्यसभा ने बुधवार को राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इस संशोधन के बाद अब को भी कानूनी संरक्षण मिल गया है। नए प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत का अपमान करता है या उसके गायन में बाधा उत्पन्न करता है, तो यह दंडनीय अपराध माना जाएगा।
राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्'
यह विधेयक विपक्ष के हंगामे और वॉकआउट के बीच ध्वनिमत से पारित हुआ। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों को मजबूत कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है।
अब क्या बदलेगा?
अब तक राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान 'जन गण मन' को कानूनी संरक्षण प्राप्त था। संशोधन के बाद राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' भी इस कानून के दायरे में शामिल हो गया है।
नए प्रावधानों के तहत निम्न कृत्य अपराध की श्रेणी में आएंगे—
राष्ट्रीय गीत का जानबूझकर अपमान करना।
'वंदे मातरम्' के गायन में जानबूझकर बाधा डालना।
राष्ट्रीय सम्मान के विरुद्ध माने जाने वाले संबंधित कृत्य।
क्या होगी सजा?
विधेयक के अनुसार, राष्ट्रीय गीत से जुड़े इन अपराधों पर अधिकतम तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। हालांकि, किसी विशेष मामले में सजा अदालत तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर तय करेगी।
विपक्ष ने क्यों किया विरोध?
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने दिल्ली में NEET पेपर लीक प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। इसी मुद्दे पर राज्यसभा में नारेबाजी और हंगामा हुआ।
उपसभापति हरिवंश ने सदस्यों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील की, लेकिन विरोध जारी रहा। बाद में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले के संबोधन के दौरान विपक्षी सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए।
सरकार का क्या कहना है?
सरकार का कहना है कि यह संशोधन राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को और अधिक प्रभावी कानूनी संरक्षण देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय गीत भी देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसे भी समान कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए।
'वंदे मातरम्' का ऐतिहासिक महत्व
'वंदे मातरम्' की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी, जिसे बाद में उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया गया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना और आजादी के संघर्ष का प्रमुख प्रतीक बना। बाद में इसे भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया।
आगे किन मुद्दों पर हो सकती है बहस?
कानून पारित होने के बाद यह चर्चा भी तेज हो सकती है कि 'अपमान' और 'गायन में बाधा' की कानूनी परिभाषा क्या होगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करने और किसी व्यक्ति के गीत गाने में शामिल न होने जैसी परिस्थितियों के बीच कानून किस प्रकार अंतर करेगा।