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राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप से सियासी पारा हाई, BJP-RSS और ECI पर निशाना
SIR विवाद के बीच राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ को संविधान पर हमला बताते हुए BJP, RSS और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। वहीं 14 आपत्तियों की रिपोर्ट पर ECI ने कहा कि SIR समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए।
Sushil Kumar Singh
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Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद बुधवार को और तेज हो गया। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर BJP, RSS और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वोटों की कथित चोरी भारतीय नागरिकों और संविधान के खिलाफ अपराध है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों ने ‘देशद्रोह’ किया है। राहुल गांधी का यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन दावों के बाद स्पष्ट किया कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026 :
राहुल गांधी ने क्या कहा ?
राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ को भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध और संविधान पर हमला बताया। उन्होंने BJP, RSS और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे ‘देशद्रोह’ करार दिया और कहा कि इस मामले में न्याय होगा। उनके बयान के बाद SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
14 आपत्तियों की रिपोर्ट में क्या दावा ?
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्ति दर्ज की।रिपोर्ट में जिन मुद्दों का जिक्र है, उनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने, वोटर डेटाबेस तक पहुंच, ERONet के नियंत्रण और पश्चिम बंगाल में मतदाता हटाने से जुड़े मामलों की अपील शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आपत्तियों में दोनों आयुक्तों ने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या कुछ फैसले उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए थे।
चुनाव आयोग ने दावे पर क्या कहा ?
रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग के सूत्रों ने इससे अलग तस्वीर पेश की। ECI के मुताबिक, SIR समेत आयोग के फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी और फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। ECI सूत्रों ने यह भी कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मुद्दों पर सवाल या चिंताएं जरूर उठाईं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि आयोग के अंतिम फैसलों में कोई असहमति थी। इस तरह फिलहाल विवाद का एक प्रमुख बिंदु यह है कि रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों को किस तरह समझा जाए—क्या वे अंतिम फैसलों पर असहमति थीं या फैसले से पहले उठाई गई प्रक्रियागत चिंताएं।
SIR को लेकर पहले से जारी है विवाद
मतदाता सूची के Special Intensive Revision को लेकर विपक्ष लंबे समय से चुनाव आयोग पर सवाल उठाता रहा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता है। पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामलों में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 27.16 लाख हटाए गए मतदाताओं में से 22 लाख से ज्यादा ने नाम बहाल कराने के लिए अपील की है। कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल होने की जानकारी आयोग ने अदालत को दी थी।
अब आमने-सामने राहुल गांधी और चुनाव आयोग
14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर नए सिरे से सवाल उठाए हैं। वहीं ECI ने फैसलों में किसी औपचारिक असहमति के दावे को खारिज करते हुए सभी निर्णयों को सर्वसम्मत बताया है। ऐसे में ‘वोट चोरी’, SIR और चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस फिलहाल जारी है। इस विवाद में राहुल गांधी के आरोपों और ECI के जवाब को अलग-अलग तथ्य के रूप में देखना जरूरी है, क्योंकि आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आयोग का आधिकारिक पक्ष एक-दूसरे से अलग हैं।