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पुखराज पहनने से पहले जान लें ये 9 नियम, किन लोगों के लिए शुभ और किसे नहीं करना चाहिए धारण | Diarch News
पुखराज पहनने से पहले जान लें ये 9 नियम, किन लोगों के लिए शुभ और किसे नहीं करना चाहिए धारण
ज्योतिषीय मान्यताओं में पुखराज को गुरु ग्रह का रत्न माना जाता है। इसे पहनने से पहले कुंडली में गुरु की स्थिति, लग्न और दूसरे ग्रहों के प्रभाव को देखना जरूरी माना जाता है। जानें कौन पुखराज पहन सकता है और किन लोगों को इससे बचने की सलाह दी जाती है।
Sapna Kashyap
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पटना, 16 सितंबर। ज्योतिष शास्त्र में पुखराज को बृहस्पति यानी गुरु ग्रह का रत्न माना जाता है। इसे ज्ञान, शिक्षा, धन, विवाह, संतान और करियर जैसे विषयों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पुखराज हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। इसे धारण करने से पहले कुंडली में गुरु की स्थिति, लग्न और दूसरे ग्रहों के साथ उसके संबंध को देखना जरूरी माना जाता है।
पुखराज किसे पहनने की सलाह दी जाती है?
ज्योतिषाचार्य डॉ. एनके बेरा के अनुसार, अगर कुंडली में गुरु पहले, पांचवें, नौवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में स्थित हो तो पुखराज धारण करने की सलाह दी जा सकती है। गुरु की राहु, केतु, शनि या मंगल के साथ युति होने पर भी कुंडली देखकर इसे पहनने की बात कही जाती है।
पुखराज से जुड़े क्या फायदे माने जाते हैं?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पुखराज को शिक्षा, ज्ञान, निर्णय क्षमता, आत्मविश्वास, आर्थिक स्थिति, करियर, विवाह और संतान से जुड़े मामलों में सकारात्मक प्रभाव वाला रत्न माना जाता है। हालांकि, इसके परिणाम व्यक्ति की कुंडली के अनुसार अलग-अलग माने जाते हैं।
किन लोगों को नहीं पहनना चाहिए?
डॉ. एनके बेरा के अनुसार मकर, कुंभ और मिथुन लग्न वालों को पुखराज पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा अगर गुरु छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो तो भी इसे धारण न करने की बात कही गई है। इन भावों को ज्योतिष में त्रिक भाव कहा जाता है।
किन लग्न वालों के लिए माना जाता है शुभ?
धनु और मीन लग्न वालों के लिए पुखराज को विशेष रूप से अनुकूल माना जाता है। वहीं मेष, कर्क, सिंह और वृश्चिक लग्न में भी कुंडली की स्थिति देखकर इसे धारण करने की सलाह दी जा सकती है।
किस उंगली और धातु में पहनें?
ज्योतिषीय परंपरा में पुखराज को दाएं हाथ की तर्जनी उंगली में पहनने की सलाह दी जाती है। इसे सोने की अंगूठी में पहनना शुभ माना जाता है। जरूरत के अनुसार पंचधातु में धारण करने की बात भी कही जाती है।
पुखराज पहनने का शुभ दिन
पुखराज को शुक्ल पक्ष के पंचमी, सप्तमी, अष्टमी, दशमी या द्वादशी तिथि वाले गुरुवार को सुबह धारण करने की मान्यता है।
पुखराज धारण करने की सरल विधि
गुरुवार सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पुखराज को दूध और फिर साफ पानी से धोएं। उस पर हल्दी, कुमकुम और फूल अर्पित करें। भगवान गणेश और गुरु ग्रह का ध्यान करते हुए ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का जाप करें और इसके बाद अंगूठी धारण करें।
खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
रत्न खरीदते समय उसकी गुणवत्ता, प्रमाणिकता और शुद्धता की जांच करें। पहले से कोई दूसरा रत्न पहना है तो दोनों के बीच ज्योतिषीय अनुकूलता भी देखी जाती है। पुखराज धारण करने से पहले व्यक्तिगत कुंडली का विश्लेषण किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से कराने की सलाह दी जाती है।
नोट: रत्नों से जुड़े लाभ और शुभ-अशुभ प्रभाव ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं; इनके प्रभावों का वैज्ञानिक प्रमाण स्थापित नहीं है।