नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026 : वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने 1937 में पारित प्रस्ताव के मुताबिक राष्ट्रगीत के दो स्तोत्र ही गाने के अपने फैसले को दोहराया है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भाजपा नेताओं को ‘फर्जी और धोखेबाज राष्ट्रवादी’ बताते हुए आरोप लगाया कि वंदे मातरम के मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस विवाद के जरिए छात्रों और आम लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की भरपूर कोशिश की जा रही है।

1937 के प्रस्ताव पर कायम कांग्रेस

कांग्रेस महासचिव ने बताया कि कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में वंदे मातरम को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 28 अक्टूबर 1937 को पारित कांग्रेस कार्य समिति के प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी इसी फैसले का पालन करेगी। कांग्रेस के मुताबिक, उस समय जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद और गोविंद वल्लभ पंत जैसे नेताओं ने रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद यह प्रस्ताव पारित किया था। पार्टी का कहना है कि वह पिछले कई दशकों से वंदे मातरम के उन्हीं दो स्तोत्रों को राष्ट्रगीत के रूप में गाती रही है।

जयराम रमेश ने मोदी पर साधा निशाना

वंदे मातरम विवाद के बीच जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी व्यक्तिगत टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मोदी को आजमाया जा चुका है और अब वह थक चुके हैं। रमेश ने प्रधानमंत्री से जल्द रिटायर होने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे को उठाकर राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेता के मुताबिक, वंदे मातरम कांग्रेस के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक विषय है, लेकिन इसे राजनीतिक विवाद में बदला जा रहा है।

अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाया था तुष्टीकरण का आरोप

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि 1937 में तुष्टीकरण की राजनीति के चलते वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांटा गया। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले के बाद देश में द्विराष्ट्र सिद्धांत को मजबूती मिली और आगे चलकर विभाजन की स्थिति बनी। शाह ने कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार ने वंदे मातरम के 150वें वर्ष के अवसर पर इस ऐतिहासिक गलती को सुधारने की दिशा में कदम उठाया है। उन्होंने कांग्रेस पर अपने राजनीतिक हितों के लिए तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

दो स्तोत्र गाने के फैसले पर बढ़ा विवाद

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल दो स्तोत्र ही गाए जाएंगे। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस का यह फैसला राष्ट्रगीत का अपमान है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि वह 1937 में तय किए गए ऐतिहासिक प्रस्ताव का ही पालन कर रही है। अब इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और वंदे मातरम विवाद ने एक बार फिर देश की राजनीति में राष्ट्रवाद, इतिहास और तुष्टीकरण की बहस को सामने ला दिया है।