नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026 : जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के हालिया बयान ने भारत, अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक चर्चाओं को एकबार फिर से तेज कर दिया है। श्रीनगर में गोर ने जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बता दिया। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से आपत्ति जताई गई और सवाल उठने लगा कि क्या वॉशिंगटन की कश्मीर नीति में कोई बदलाव आया है ? जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट ब्रह्मा चेलानी ने इस पूरे घटनाक्रम को अमेरिकी विदेश नीति के व्यापक संदर्भ में समझाया है। उनका कहना है कि किसी अमेरिकी राजदूत के बयान को सीधे तौर पर अमेरिका की आधिकारिक विदेश नीति में बदलाव नहीं माना जा सकता है।

सर्जियो गोर के बयान से क्यों मचा बवाल ?

अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। जबकि भारत के लिए यह बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताता रहा है। वहीं पाकिस्तान ने इस बयान पर अपनी आपत्ति जताई है। इससे यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या अमेरिका ने कश्मीर के मुद्दे पर अपना पुराना रुख बदलना शुरू कर दिया है।

ब्रह्मा चेलानी ने बताया अमेरिकी नीति का ‘असली खेल’

ब्रह्मा चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया में साफ कहा कि अमेरिकी राजदूत जिस देश में तैनात होते हैं, वहां के द्विपक्षीय संबंधों को ध्यान में रखते हुए संदेश दे सकते हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिकी विदेश विभाग की आधिकारिक नीति भी बदल गई है। यानी सर्जियो गोर का बयान भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में देखा जा सकता है, लेकिन इसे अमेरिका की Kashmir Policy में बड़ा बदलाव मानना जल्दबाजी होगी।

अमेरिका की कश्मीर नीति में पहले भी दिखी अलग-अलग तस्वीर

चेलानी ने अपने विश्लेषण में अमेरिका के पिछले कुछ बयानों और गतिविधियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लोम पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर गए थे। वहां उन्होंने पाकिस्तान में इस्तेमाल होने वाली ‘आजाद जम्मू और कश्मीर’ जैसी शब्दावली का इस्तेमाल किया था। भारत ने उस समय अमेरिकी राजदूत की यात्रा और उनके बयानों पर घोर आपत्ति जताई थी। यही वजह है कि मौजूदा बयान को अमेरिका के पिछले रुख के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।

‘राजदूत रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं’

ब्रह्मा चेलानी के मुताबिक, सर्जियो गोर एक राजदूत के तौर पर भारत और अमेरिका के संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका ताजा बयान इसी कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, चेलानी ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले कश्मीर मुद्दे को लेकर बयान दे चुके हैं। इसलिए सिर्फ राजदूत के एक बयान के आधार पर अमेरिका की पूरी विदेश नीति में बदलाव का निष्कर्ष निकालना कतई उचित नहीं होगा।

पहलगाम हमले के बाद भी उठा था कश्मीर मुद्दा

चेलानी ने भारत-पाकिस्तान तनाव के संदर्भ में पहलगाम आतंकी हमले के बाद की अमेरिकी प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि उस दौरान ट्रंप ने सीमा पार आतंकवाद पर स्पष्ट रुख अपनाने के बजाय कई मौकों पर कश्मीर को विवाद के केंद्र के रूप में पेश किया। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाता रहा है और कश्मीर मुद्दे को आतंकवाद से अलग रखने की बात करता है।

भारत के लिए सर्जियो गोर का बयान कितना अहम ?

सर्जियो गोर का श्रीनगर में दिया गया बयान ऐसे समय आया है जब भारत-अमेरिका संबंध कई रणनीतिक और व्यापारिक मुद्दों से गुजर रहे हैं। ऐसे में जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी का कूटनीतिक महत्व जरूर है। हालांकि, किसी राजदूत के बयान और अमेरिकी प्रशासन की आधिकारिक नीति में अंतर होता है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में अमेरिकी विदेश विभाग और ट्रंप प्रशासन कश्मीर को लेकर किस तरह की आधिकारिक भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

क्या सच में बदल गई अमेरिका की Kashmir Policy ?

फिलहाल उपलब्ध बयानों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका ने कश्मीर पर अपनी आधिकारिक नीति पूरी तरह बदल दी है। सर्जियो गोर का बयान भारत के पक्ष में महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत जरूर माना जा सकता है, लेकिन अमेरिकी विदेश नीति में वास्तविक बदलाव का आकलन व्यापक आधिकारिक बयानों और फैसलों से ही किया जा सकता है। इसलिए कश्मीर पर अमेरिकी रुख को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या सर्जियो गोर का बयान सिर्फ भारत-अमेरिका रिश्तों को मजबूत करने की कूटनीतिक कोशिश है या आने वाले समय में वॉशिंगटन की नीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा ?