नई दिल्ली, 24 अगस्त 2026 : केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने जाति आधारित आरक्षण को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा है कि आरक्षण कोई खैरात नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है। चिराग पासवान ने आरक्षण की समीक्षा या उसमें बदलाव की मांगों पर भी चिंता जताई और कहा कि समाज में जातिगत भेदभाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन से इतर पत्रकारों के साथ बातचीत में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था डॉ. भीमराव आंबेडकर की सोच और संविधान की भावना के अनुरूप स्थापित हुई थी। उन्होंने कहा कि जब तक वह केंद्र सरकार का हिस्सा हैं, आरक्षण की व्यवस्था से किसी तरह का समझौता नहीं होने देंगे।
‘आरक्षण किसी की खैरात नहीं’
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण को खत्म करने या कमजोर करने की बात करने वालों को यह समझना चाहिए कि यह व्यवस्था क्यों जरूरी है। उन्होंने कहा कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी की ओर से दी गई सहायता या खैरात नहीं माना जा सकता। उन्होंने एनडीए में शामिल दलों के संदर्भ में कहा कि अलग-अलग नेताओं के बयान के आधार पर आरक्षण खत्म नहीं किया जा सकता। चिराग पासवान ने आरक्षण को लेकर अपनी पार्टी की स्थिति को स्पष्ट बताते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर समझौता नहीं करेंगे।
सामाजिक भेदभाव का दिया उदाहरण
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव का जिक्र करते हुए कहा कि आरक्षण की जरूरत को समझने के लिए समाज की मौजूदा स्थिति को भी देखना होगा। उन्होंने दलित दूल्हों को बारात निकालने से रोके जाने और दलित नेताओं के मंदिर जाने के बाद कथित तौर पर परिसर की सफाई किए जाने जैसी घटनाओं का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। चिराग पासवान ने सवाल उठाया कि जब समाज में इस तरह का भेदभाव अभी भी मौजूद है तो आरक्षण की आवश्यकता पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं।
क्रीमी लेयर पर भी चिराग ने जताई आपत्ति
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अनुसूचित जाति में क्रीमी लेयर की अवधारणा का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि उप-वर्गीकरण और क्रीमी लेयर जैसे मुद्दों से समुदाय की सामूहिक ताकत प्रभावित हो सकती है। चिराग पासवान के मुताबिक अनुसूचित जाति समुदाय पहले से ही सामाजिक भेदभाव का सामना करता रहा है। ऐसे में आरक्षण व्यवस्था में ऐसे बदलावों पर विचार करते समय इसके व्यापक सामाजिक प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए।
सवर्णों के 10 फीसदी आरक्षण का किया जिक्र
चिराग पासवान ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए दिए गए 10 फीसदी आरक्षण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने ऊंची जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए ईडब्ल्यूएस आरक्षण की व्यवस्था की है। उन्होंने अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्गों की सामाजिक एवं ऐतिहासिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया और कहा कि आरक्षण की व्यवस्था अलग-अलग समुदायों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।




