बिहार में फैल रहा सूखे नशे का जाल, रोकथाम में प्रशासन भी नाकाम; युवाओं में तेजी से बढ़ रही लत•पटना में प्रबुद्ध सम्मेलन, शिवराज सिंह चौहान बोले—मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर •रौशन आनंद को मिली जमानत, भाई प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार में होंगे शामिल•India Marks First Anniversary of Pahalgam Terror Attack; PM Modi Vows 'We Will Never Bow to Terror'•बिहार में फैल रहा सूखे नशे का जाल, रोकथाम में प्रशासन भी नाकाम; युवाओं में तेजी से बढ़ रही लत•पटना में प्रबुद्ध सम्मेलन, शिवराज सिंह चौहान बोले—मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर •रौशन आनंद को मिली जमानत, भाई प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार में होंगे शामिल•India Marks First Anniversary of Pahalgam Terror Attack; PM Modi Vows 'We Will Never Bow to Terror'•
जानिए सदियों पुरानी इस परंपरा का रहस्य बाबा बैद्यनाथ-मां पार्वती मंदिर के बीच क्यों बंधा है लाल धागा? | Diarch News
जानिए सदियों पुरानी इस परंपरा का रहस्य बाबा बैद्यनाथ-मां पार्वती मंदिर के बीच क्यों बंधा है लाल धागा?
देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम में बाबा बैद्यनाथ और मां पार्वती मंदिर के शिखरों के बीच बंधा लाल धागा श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण है। धार्मिक मान्यता में इसे शिव-शक्ति के अटूट संबंध, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
Sapna Kashyap
1 व्यू
Share
देवघर, 16 अगस्त। झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर की कई धार्मिक परंपराएं श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। इन्हीं में बाबा बैद्यनाथ मंदिर और मां पार्वती मंदिर के शिखरों के बीच बंधा लाल धागा भी शामिल है।
दो मंदिरों के शिखरों को जोड़ता है लाल धागा
बाबा बैद्यनाथ मंदिर और मां पार्वती मंदिर के शिखरों को एक लाल धागे से जोड़ा गया है। पहली नजर में यह धागा सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन धार्मिक मान्यता में इसे विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट संबंध का प्रतीक मानते हैं।
शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती एक-दूसरे के पूरक हैं। बाबा बैद्यनाथ को भगवान शिव के स्वरूप में और मां पार्वती को शक्ति के रूप में पूजा जाता है। दोनों मंदिरों के बीच जुड़ा लाल धागा इसी शिव-शक्ति के संबंध और दांपत्य एकता का प्रतीक माना जाता है।
सावन में श्रद्धालुओं का ध्यान खींचता है यह दृश्य
सावन के महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं और कांवरियों की संख्या काफी बढ़ जाती है। बाबा पर जल चढ़ाने पहुंचने वाले भक्त मंदिर परिसर में इस परंपरा को भी श्रद्धा के साथ देखते हैं। कई श्रद्धालु लाल धागे को शिव और शक्ति के पवित्र मिलन तथा अटूट प्रेम से जोड़कर देखते हैं।
देवघर की धार्मिक पहचान का हिस्सा
बाबा बैद्यनाथ धाम की पहचान केवल ज्योतिर्लिंग के कारण ही नहीं, बल्कि यहां की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं से भी जुड़ी है। मंदिरों के शिखरों के बीच बंधा लाल धागा भी ऐसी ही परंपरा का हिस्सा है, जिसे श्रद्धालु प्रेम, विश्वास, समर्पण और अटूट रिश्ते के प्रतीक के रूप में देखते हैं।
देवघर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह धार्मिक परंपरा बाबा बैद्यनाथ धाम की आध्यात्मिक विशेषताओं को और खास बनाती है।