बिहार में फैल रहा सूखे नशे का जाल, रोकथाम में प्रशासन भी नाकाम; युवाओं में तेजी से बढ़ रही लत•पटना में प्रबुद्ध सम्मेलन, शिवराज सिंह चौहान बोले—मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर •रौशन आनंद को मिली जमानत, भाई प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार में होंगे शामिल•India Marks First Anniversary of Pahalgam Terror Attack; PM Modi Vows 'We Will Never Bow to Terror'•बिहार में फैल रहा सूखे नशे का जाल, रोकथाम में प्रशासन भी नाकाम; युवाओं में तेजी से बढ़ रही लत•पटना में प्रबुद्ध सम्मेलन, शिवराज सिंह चौहान बोले—मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर •रौशन आनंद को मिली जमानत, भाई प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार में होंगे शामिल•India Marks First Anniversary of Pahalgam Terror Attack; PM Modi Vows 'We Will Never Bow to Terror'•
High Court का बड़ा फैसला : कमाऊ पत्नी भी उठाए घर-बच्चे की जिम्मेदारी, मेंटेनेंस राशि आधी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि कमाऊ पत्नी भी घर और बच्चों की जिम्मेदारी साझा करेगी। अदालत ने पति की याचिका पर मेंटेनेंस राशि आधी करते हुए समान जिम्मेदारी पर जोर दिया।
Sapna Kashyap
2 व्यू
Share
मुंबई | 29 जुलाई 2026
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पति-पत्नी की आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यदि दोनों जीवनसाथी कमाते हैं, तो घर चलाने और बच्चों की पढ़ाई सहित अन्य खर्चों की जिम्मेदारी भी दोनों को मिलकर उठानी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि समानता का सिद्धांत केवल सुविधा के अनुसार लागू नहीं किया जा सकता।
फैमिली कोर्ट का आदेश बदला
जस्टिस एम.एम. सताये की एकल पीठ ने फैमिली कोर्ट के जनवरी 2025 के आदेश में संशोधन करते हुए पति द्वारा पत्नी और नाबालिग बेटे को दी जाने वाली मासिक मेंटेनेंस राशि 50 हजार रुपये से घटाकर 25 हजार रुपये कर दी थी।
यह फैसला पति की उस याचिका पर आया, जिसमें उसने बढ़ते आर्थिक बोझ का हवाला देते हुए मेंटेनेंस कम करने की मांग की थी।
पति ने कोर्ट में क्या दलील दी ?
इस बीच सुनवाई के दौरान पति ने बताया कि वह दो मकानों की ईएमआई चुका रहा है। एक मुंबई के अंधेरी स्थित फ्लैट की, जहां पत्नी और बेटा रह रहे हैं, जबकि दूसरा नवी मुंबई के पनवेल स्थित घर का है। वहीं, वह स्वयं बिहार में रहकर नौकरी कर रहा है।
पति का कहना था कि उसकी पत्नी भी नौकरी करती हैं, लेकिन वह न तो घर की ईएमआई में कोई आर्थिक योगदान देती है और न ही अन्य खर्चों में सहयोग करती है।
पत्नी को दिया था दूसरा विकल्प
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उसने पत्नी से बिहार आकर साथ रहने या फिर पनवेल स्थित घर में शिफ्ट होने का अनुरोध किया था, ताकि आर्थिक बोझ कम किया जा सके। हालांकि पत्नी ने दोनों प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि यदि पति-पत्नी दोनों आर्थिक रूप से सक्षम हैं, तो परिवार की जिम्मेदारियां भी साझा होनी चाहिए। हाईकोर्ट कोर्ट ने टिप्पणी की कि समानता का दावा चुनिंदा परिस्थितियों में नहीं किया जा सकता। यदि दोनों कमाते हैं और परिवार बेहतर जीवनशैली तथा बच्चे को अच्छी शिक्षा देना चाहता है, तो उसके लिए होने वाला खर्च भी दोनों को मिलकर उठाना चाहिए।
आर्थिक योगदान भी जरूरी
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई पक्ष महंगे इलाके में रहना चाहता है, तो उससे जुड़े अतिरिक्त खर्चों में उसका भी आर्थिक योगदान होना चाहिए। ऐसे में पूरा वित्तीय बोझ केवल एक व्यक्ति पर डालना उचित नहीं माना जा सकता।
फैसले का महत्व
यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां पति-पत्नी दोनों नौकरीपेशा हैं और मेंटेनेंस या पारिवारिक खर्चों को लेकर विवाद चल रहा है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आर्थिक रूप से सक्षम दोनों पक्षों को परिवार की जिम्मेदारियों का समान रूप से निर्वहन करना चाहिए।