नई दिल्ली, 20 सितंबर। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा इस साल 26 सितंबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व है। पूर्णिमा के दिन स्नान, दान-पुण्य और सत्यनारायण भगवान की पूजा करने की परंपरा भी है। भाद्रपद पूर्णिमा के साथ ही पितृ पक्ष की शुरुआत मानी जाती है, इसलिए इस दिन पितरों का स्मरण और तर्पण भी किया जाता है।

कब शुरू और खत्म होगी पूर्णिमा तिथि?

पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर की रात 11:06 बजे शुरू होगी और 26 सितंबर की रात 10:18 बजे समाप्त होगी। 26 सितंबर की शाम करीब 5:25 बजे चंद्रोदय होगा। ऐसे में चंद्र देव को अर्घ्य चंद्रोदय के बाद दिया जा सकता है।

भाद्रपद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

भाद्रपद पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ सत्यनारायण कथा करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूजा, दान और जरूरतमंदों की मदद करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। कई श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान भी करते हैं।

इस दिन से पितृ पक्ष की शुरुआत होने के कारण पितरों का स्मरण और तर्पण करने की परंपरा भी जुड़ी है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इससे जुड़े रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की क्या मान्यता है?

धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में चंद्रमा को मन से जोड़ा जाता है। पूर्णिमा पर चंद्रमा अपने पूर्ण रूप में दिखाई देता है। इसलिए चंद्र देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है।

चंद्र देव को कैसे दें अर्घ्य?

चंद्रोदय के बाद स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव का ध्यान करें। इसके बाद तांबे या चांदी के पात्र में जल लें। इसमें अक्षत और फूल डालकर चंद्रमा की ओर देखते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करें। अंत में सुख-शांति और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करें।

नोट: पूजा के समय और विधि के लिए अपने स्थानीय पंचांग को प्राथमिकता दें, क्योंकि स्थान के अनुसार चंद्रोदय और धार्मिक मुहूर्त में अंतर हो सकता है।