नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने आर्ट ऑफ लिविंग संस्था को बड़ी राहत देते हुए यमुना के बाढ़ क्षेत्र में 2016 में आयोजित विश्व संस्कृति महोत्सव से जुड़े मामले में लगाए गए पांच करोड़ रुपये के पर्यावरणीय जुर्माने को रद्द कर दिया है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को जुर्माने के रूप में जमा की गई राशि वापस करने का निर्देश दिया है। यह मामला करीब एक दशक से अदालतों में चल रहा था। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 2016 में यमुना के बाढ़ क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण और जैव विविधता को नुकसान पहुंचने के आरोप में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन पर 5 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि DDA इको-सेंसिटिव जोन की सुरक्षा की अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा कोई प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम के कारण यमुना के संवेदनशील क्षेत्र को नुकसान पहुंचा। शीर्ष अदालत ने DDA को निर्देश दिया कि व्यक्ति विकास केंद्र की ओर से जमा किए गए 5 करोड़ रुपये वापस किए जाएं। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र के पुनर्वास से जुड़ा काम DDA को NGT के निर्देशों के अनुसार जारी रखना होगा।
क्या है 2016 का पूरा मामला ?
साल 2016 में आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से दिल्ली में यमुना के बाढ़ क्षेत्र में 'विश्व संस्कृति महोत्सव' का आयोजन किया गया था। आयोजन को लेकर पर्यावरणीय नुकसान और जैव विविधता प्रभावित होने के आरोप लगाए गए थे। मार्च 2016 में NGT ने कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण को हुए कथित नुकसान के लिए 5 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया था। संस्था ने यह राशि जमा भी कर दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और करीब 10 वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चली। अब शीर्ष अदालत ने जुर्माने को रद्द करते हुए जमा राशि वापस करने का आदेश दिया है।
कौन है व्यक्ति विकास केंद्र ?
व्यक्ति विकास केंद्र, श्री श्री रविशंकर द्वारा स्थापित आर्ट ऑफ लिविंग संगठन से जुड़ा एक पंजीकृत सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट है। इसी संस्था की ओर से जुर्माने की राशि जमा की गई थी।
यमुना बाढ़ क्षेत्र के पुनर्वास का काम जारी रहेगा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संस्था को आर्थिक राहत मिली है, लेकिन अदालत ने यमुना के बाढ़ क्षेत्र के पुनर्वास की जिम्मेदारी से DDA को मुक्त नहीं किया है। अदालत ने NGT के निर्देशों के अनुरूप क्षेत्र के पुनर्वास का काम जारी रखने को कहा है। इस फैसले के बाद करीब एक दशक पुराने Art of Living Yamuna Floodplain Case में एक महत्वपूर्ण कानूनी अध्याय समाप्त हो गया है।




