पटना, 22 अगस्त 2026: बिहार की राजधानी पटना के सुनियोजित विस्तार और भविष्य की शहरी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकास योजना 2047 पर हितधारकों के साथ मंथन शुरू हो गया है। शनिवार को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से महत्वपूर्ण हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने की। बैठक में सरकार, स्थानीय निकायों, उद्योग जगत, बैंकिंग क्षेत्र, वास्तु एवं टाउन प्लानिंग से जुड़े विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों ने प्रस्तावित टाउनशिप के विकास मॉडल पर चर्चा की। बैठक में योजना को अधिक सहभागी और जनहित आधारित बनाने के लिए सुझाव और आपत्तियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
किसानों और भू-स्वामियों से सीधे संवाद पर जोर
नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप केवल नया शहर बसाने की योजना नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य के शहरी विकास को बेहतर तरीके से नियोजित करने का प्रयास है। इसमें किसान, भू-स्वामी, स्थानीय समुदाय, सरकार और अन्य हितधारक अहम भागीदार होंगे। उन्होंने कहा कि विभाग हितधारकों के साथ लगातार संवाद करेगा। किसानों और भू-स्वामियों के बीच जाकर योजना के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी और उनके सुझावों को गंभीरता से सुना जाएगा। खास तौर पर जिन भू-स्वामियों की जमीन योजना के दायरे में आ रही है, उनसे प्रत्यक्ष संवाद कर उनकी सहभागिता व सहमति के साथ योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
नौ प्रखंडों के 273 गांव होंगे योजना में शामिल
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का प्रस्तावित क्षेत्र करीब 81,730 एकड़ में फैला होगा। यह क्षेत्र पटना जिले के 9 प्रखंडों के 273 गांवों तक विस्तृत है। योजना में पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा, संपतचक, पटना ग्रामीण, धनरुआ, दनियावां और फुलवारी प्रखंडों के क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा नौबतपुर नगर पंचायत का आंशिक और पुनपुन नगर पंचायत का पूरा क्षेत्र भी प्रस्तावित विशेष क्षेत्र में शामिल है। टाउनशिप में करीब 3,008 एकड़ का कोर एरिया प्रस्तावित है, जिसमें पुनपुन प्रखंड के 19 गांव शामिल होंगे।
आवास से रोजगार तक, एकीकृत विकास का लक्ष्य
प्रस्तावित टाउनशिप में केवल आवासीय क्षेत्र विकसित करने के बजाय मिश्रित और संतुलित भूमि उपयोग को बढ़ावा देने की योजना है। इसके तहत सड़क, सार्वजनिक परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, पार्क, जलापूर्ति, सीवरेज और जल निकासी जैसी सुविधाओं को एकीकृत तरीके से विकसित करने पर जोर होगा। योजना में TOD यानी Transit-Oriented Development, पैदल और साइकिल के लिए बेहतर सुविधाएं तथा सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। इससे भविष्य में वाहन निर्भरता कम करने और बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने में मदद मिल सकती है।
हरित क्षेत्र और जल निकायों के संरक्षण पर भी जोर
टाउनशिप में सेक्टर पार्क, सामुदायिक पार्क, हरित गलियारे और खेल क्षेत्रों के विकास के साथ जल निकायों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य आधुनिक शहरी सुविधाओं के साथ पर्यावरण-अनुकूल और बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
भूमि पूलिंग से भू-स्वामियों की भागीदारी पर जोर
टाउनशिप के विकास में विकास योजना, भूमि उपयोग योजना और टाउन प्लानिंग स्कीम को महत्वपूर्ण आधार बनाया जाएगा। भूमि पूलिंग, भूमि पुनर्संयोजन या लागू भूमि व्यवस्था के जरिए भू-स्वामियों को विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाने का प्रयास किया जाएगा। छोटे भू-स्वामियों, किसानों और स्थानीय समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए विकास को सहभागी और न्यायसंगत बनाने पर जोर रहेगा। जहां आवश्यक होगा, लागू कानून के तहत सहमति आधारित व्यवस्था या भूमि अर्जन की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
निवेश और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद
सरकार का मानना है कि पाटलिपुत्र टाउनशिप के विकास से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। बढ़ती आबादी और आर्थिक गतिविधियों के कारण पटना के मौजूदा शहरी क्षेत्रों पर बढ़ रहे दबाव को देखते हुए यह परियोजना शहर के सुनियोजित विस्तार में अहम भूमिका निभा सकती है।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?
बैठक में नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, सचिव संदीप कुमार आर. पुडकलकट्टी, प्रबंध निदेशक-सह-सचिव अनिमेष कुमार पराशर, बिहार राज्य आवास बोर्ड के प्रबंध निदेशक-सह-विशेष सचिव निलेश रामचंद्र देवरे, पटना नगर निगम के आयुक्त यशपाल मीणा, विशेष सचिव शाहिद परवेज, अपर सचिव मनोज कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा नगर एवं क्षेत्रीय नियोजन संगठन के अधिकारियों, विभिन्न नगर निगमों के नगर आयुक्तों, CREDAI बिहार, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स, स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी के सदस्य बैंकों, ITPI, IIA और IEI के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया। सरकार की ओर से कहा गया कि हितधारकों से मिलने वाले सुझाव व आपत्तियां योजना को व्यावहारिक, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी। इस तरह पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को बिहार के भविष्य के लिए आधुनिक, आर्थिक रूप से सक्रिय, पर्यावरण-अनुकूल व जनहित आधारित शहरी विकास मॉडल के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है।




