गोपालगंज, 21 अगस्त 2026 : बिहार के गोपालगंज में पुलिस विभाग से जुड़ा कथित वसूली का मामला सामने आने के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। यादोपुर थाने के SHO सह सब-इंस्पेक्टर अनिल राम समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि पांच लोगों को करीब 36 घंटे तक बिना प्राथमिकी दर्ज किए और बिना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के थाने में रखा गया। इसके बाद उन्हें छोड़ने के बदले कुल 1.30 लाख रुपये लेने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपियों में कथित बिचौलिया राजू यादव, स्टेशन ड्राइवर राकेश कुमार और चौकीदार महंत कुमार यादव मुख्य रूप से शामिल हैं। इस मामले में पुलिस की जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है।

16 अगस्त को मिली थी मामले की सूचना

गोपालगंज के एसपी विनय तिवारी के अनुसार, उन्हें 16 अगस्त को इस मामले की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद DSP मुख्यालय को जांच की जिम्मेदारी दी गई। जांच के दौरान संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की गई। DSP ने 18 अगस्त को अपनी रिपोर्ट SP को सौंपी। इस रिपोर्ट के आधार पर SHO समेत चार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

गांजा रखने के शक में थाने लाए गए थे पांच लोग

पुलिस के मुताबिक आठ जुलाई को यादोपुर इलाके में गांजा रखने के आरोप में छापेमारी की गई थी। इसी दौरान एक महिला, उसकी नाबालिग बेटी और बेतिया से मवेशी खरीदने आए तीन पुरुषों को पूछताछ के लिए थाने लाया गया। जांच में इन पांचों का गांजा मामले से कोई सीधा संबंध नहीं मिलने की बात सामने आई। इसके बावजूद आरोप है कि उन्हें करीब 36 घंटे तक थाने में रखा गया। पुलिस के अनुसार, इस हिरासत की कोई एंट्री स्टेशन डायरी में भी दर्ज नहीं की गई थी।

छोड़ने के बदले 1.30 लाख रुपये मांगने का आरोप

जांच में कथित वसूली से जुड़े साक्ष्य भी मिलने की बात कही गई है। आरोप है कि हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने के बदले उनसे पैसे मांगे गए और उन्हें धमकाया गया। पुलिस के अनुसार, महिला और उसकी नाबालिग बेटी को छोड़ने के लिए कथित तौर पर चौकीदार महंत यादव के माध्यम से 75 हजार रुपये लिए गए। वहीं, एक अन्य व्यक्ति को मामले से बाहर रखने के लिए 55 हजार रुपये लेने का आरोप है। इस तरह कुल 1.30 लाख रुपये की कथित वसूली का मामला सामने आया।

CCTV और मोबाइल से मिले अहम साक्ष्य

जांच टीम ने थाने में लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच की। पुलिस के अनुसार, फुटेज में पांचों लोगों की आठ और नौ जुलाई के बीच करीब 36 घंटे तक थाने में मौजूदगी की पुष्टि हुई। इसके अलावा मोबाइल फोन से मिले साक्ष्यों में तत्कालीन SHO अनिल राम और कथित बिचौलिये के बीच कई बार बातचीत होने की जानकारी सामने आई। जांच में गवाहों को कथित तौर पर प्रभावित करने और डराने-धमकाने की कोशिश के आरोपों की भी पड़ताल की गई।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला

जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान चारों आरोपियों ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। अनिल राम और चौकीदार महंत कुमार यादव को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।