GST के अगले दौर में टेक्नोलॉजी पर सरकार का बड़ा फोकस

नई दिल्ली: देश में 1 जुलाई 2017 को लागू हुआ वस्तु एवं सेवा कर (GST) अब अपने दसवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। शुरुआती वर्षों में जहां सरकार का ध्यान पूरे सिस्टम को स्थिर करने पर था, वहीं अब अगला लक्ष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा इंटीग्रेशन और स्मार्ट टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन के जरिए टैक्स व्यवस्था को अधिक सरल, तेज और पारद र्शी बनाना है। सरकार विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र के लिए अनुपालन (Compliance) का बोझ कम करने की दिशा में काम कर रही है।

GST से अब तक क्या बदला?

GST लागू होने से पहले देश में केंद्र और राज्यों के अलग-अलग अप्रत्यक्ष कर लागू होते थे। GST ने इन करों को एकीकृत कर पूरे देश में एक समान टैक्स व्यवस्था लागू की। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, GST पंजीकृत करदाताओं की संख्या 66.5 लाख से बढ़कर लगभग 1.6 करोड़ हो चुकी है। वहीं औसत मासिक GST संग्रह 2017-18 के लगभग ₹89,700 करोड़ से बढ़कर FY26 में करीब ₹1.85 लाख करोड़ पहुंच गया है। इससे टैक्स बेस बढ़ा है और अनुपालन में भी सुधार दर्ज किया गया है।

AI और डेटा इंटीग्रेशन से क्या होगा फायदा?

सरकार अब GST, आयकर और कस्टम्स के डेटाबेस को आपस में जोड़कर AI आधारित जोखिम विश्लेषण (Risk Assessment) तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC), फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी की पहचान तेज करना है। साथ ही रिटर्न की जांच में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, रिफंड प्रक्रिया तेज होगी और ईमानदार करदाताओं को कम परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

MSME को क्या मिलेगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे कारोबारियों के लिए सबसे बड़ा लाभ कम कागजी प्रक्रिया, तेज रिफंड, आसान रिटर्न फाइलिंग और विवादों में कमी के रूप में सामने आ सकता है। Deloitte की हालिया रिपोर्ट के अनुसार करीब 99% कंपनियों ने GST के अनुभव को सकारात्मक या तटस्थ बताया है, जबकि अब उद्योग जगत AI आधारित अनुपालन और डेटा आधारित विवाद निपटान की मांग कर रहा है।

अभी भी बाकी हैं कई चुनौतियां

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी कई सुधार बाकी हैं। पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) जैसे उत्पाद अभी GST के दायरे से बाहर हैं। इसके अलावा छोटे व्यापारियों के लिए कुछ प्रक्रियाओं को और सरल बनाने तथा अपीलीय व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत भी बताई जा रही है।

क्या बदल सकता है आने वाला दौर?

GST के अगले चरण में सरकार का लक्ष्य केवल टैक्स वसूली बढ़ाना नहीं, बल्कि कम लागत, तेज सेवा और स्मार्ट टेक्नोलॉजी आधारित टैक्स सिस्टम तैयार करना है। यदि AI आधारित निगरानी, डेटा इंटीग्रेशन और तेज रिफंड जैसी योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में कारोबारियों, खासकर MSME सेक्टर, के लिए टैक्स अनुपालन पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो सकता है।