2030 तक 30 अरब डॉलर निवेश का ऐलान

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग के बीच ऑस्ट्रेलियाई डेटा सेंटर कंपनी AirTrunk ने 5 जून 2026 को भारत में 30 अरब डॉलर (करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये) निवेश की घोषणा की है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश में 5 गीगावाट (GW) डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है। इसे भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में सबसे बड़े विदेशी निवेशों में गिना जा रहा है।

भारत का डेटा सेंटर बाजार क्यों आकर्षित कर रहा निवेश?

भारत की मौजूदा डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.5GW है, जिसके 2030 तक 8GW तक पहुंचने का अनुमान है। तेजी से बढ़ते AI, क्लाउड, डिजिटल पेमेंट, OTT और डेटा स्टोरेज बाजार ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बना दिया है। AirTrunk भारतीय बाजार में प्रवेश के लिए Lumina CloudInfra का अधिग्रहण कर चुकी है और मुंबई, चेन्नई व हैदराबाद में करीब 600MW विकास पाइपलाइन पर काम कर रही है।

महाराष्ट्र में बनेगा 21 अरब डॉलर का मेगा प्रोजेक्ट

कंपनी की सबसे बड़ी परियोजना महाराष्ट्र के रायगढ़ में प्रस्तावित है। यहां करीब 3GW क्षमता वाला डेटा सेंटर पार्क विकसित किया जाएगा, जिसमें लगभग 21 अरब डॉलर का निवेश होगा। राज्य सरकार ने भी परियोजना के लिए शुरुआती समर्थन और भूमि आवंटन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की सहमति दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दुनिया के सबसे बड़े AI डेटा सेंटर परिसरों में शामिल हो सकता है।

Adani-Jabil साझेदारी से बढ़ी प्रतिस्पर्धा

हाल ही में Adani Group और अमेरिकी कंपनी Jabil ने भारत में AI डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और हार्डवेयर निर्माण के लिए साझेदारी की घोषणा की है। इसका उद्देश्य AI सर्वर, रैक और अन्य उपकरणों का स्थानीय उत्पादन बढ़ाना है। इससे भारत को AI हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर

विश्लेषकों का अनुमान है कि डेटा सेंटर सेक्टर में बढ़ते निवेश से आईटी, इंजीनियरिंग, निर्माण, नेटवर्किंग और ऊर्जा क्षेत्रों में हजारों प्रत्यक्ष तथा लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI युग में डेटा सेंटर वही भूमिका निभाएंगे जो औद्योगिक विकास में बिजली संयंत्रों ने निभाई थी।

निष्कर्ष

AirTrunk का 30 अरब डॉलर का निवेश केवल एक कारोबारी सौदा नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य पर लगाया गया बड़ा दांव है। यदि परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो भारत 2030 तक दुनिया के प्रमुख AI और डेटा सेंटर हब में शामिल हो सकता है।