पटना | 6 अगस्त 2026
बिहार सरकार में मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) से जुड़े नेता दीपक प्रकाश के बिहार विधान परिषद (MLC) में मनोनयन को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। राज्यपाल द्वारा उन्हें विशिष्ट योगदान (Nominated Category) के तहत विधान परिषद का सदस्य बनाए जाने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता सूर्यकांत 'अनल' ने इस फैसले पर सवाल उठा दिए हैं। उनका कहना है कि इस श्रेणी में मनोनयन के लिए संविधान में तय मानदंडों का पालन जरूर होना चाहिए।
'विशिष्ट योगदान' श्रेणी को लेकर उठे सवाल
सूर्यकांत 'अनल' ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 171 के तहत राज्यपाल विधान परिषद में कुल सदस्यों के एक-छठे हिस्से तक सदस्यों का मनोनयन कर सकते हैं। यह व्यवस्था उन लोगों के लिए है जिन्होंने साहित्य, पत्रकारिता, कला, विज्ञान और सहकारिता या समाज सेवा जैसे विशेष क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। उन्होंने सवाल उठाया कि मंत्री दीपक प्रकाश का मनोनयन किस विशेष योगदान के आधार पर किया गया है। यह बड़ा सवाल है।
'आठ-नौ महीने की राजनीतिक यात्रा' पर टिप्पणी
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने दावा किया कि दीपक प्रकाश की सक्रिय राजनीतिक यात्रा अभी अधिक पुरानी नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे में उन्हें विशिष्ट योगदान श्रेणी से विधान परिषद भेजे जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सूर्यकांत 'अनल' ने यह भी कहा कि पहले इस श्रेणी की सीट पर पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति का मनोनयन हुआ था। उनके अनुसार, रिक्त हुई सीट पर उसी तरह के योग्य व्यक्ति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी।
'जल्दबाजी में लिया गया फैसला' का आरोप
भाजपा नेता सूर्यकांत 'अनल' ने आरोप लगाया कि मंत्री दीपक प्रकाश के मनोनयन का फैसला जल्दबाजी में लिया गया है। उनका कहना है कि पार्टी को इस निर्णय की जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट तरीके से देनी चाहिए थी। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक मजबूरी से जोड़ते हुए भाजपा की रणनीति पर भी सवाल उठाए हैं और कहा कि यह सही नहीं है।
मंत्री पद और कानूनी प्रक्रिया की भी चर्चा
वरिष्ठ भाजपा नेता ने दावा किया है कि मंत्री पद से जुड़े कानूनी पहलुओं और अदालत में लंबित मामले के कारण दीपक प्रकाश का जल्द MLC बनना राजनीतिक रूप से आवश्यक माना गया। हालांकि, इस संबंध में सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
राजनीतिक बहस तेज
मंत्दीी रपक प्रकाश के मनोनयन के बाद बिहार की राजनीति में इस मुद्दे पर नई बहस छिड़ गई है। विपक्ष के साथ-साथ राजनीतिक विश्लेषक भी इस फैसले पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।




