पटना, 12 अगस्त 2026 : बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 के आसपास समाप्त होने वाला है। ऐसे में समय पर पंचायत चुनाव कराने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। चुनाव से पहले पंचायतों का परिसीमन भी किया जाना है। आबादी के आधार पर पंचायत और वार्डों का पुनर्गठन होने के बाद कई सीटों का गणित बदल सकता है। ऐसे में मुखिया और अन्य पंचायत पदों के लिए दावेदारों की संख्या बढ़ने की संभावना है। अगर आप भी बिहार में मुखिया का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले पात्रता और अयोग्यता से जुड़े जरूरी नियम जान लेना बेहद जरूरी है।
मुखिया का चुनाव लड़ने के लिए कितनी उम्र जरूरी ?
बिहार पंचायत चुनाव में मुखिया पद के लिए उम्मीदवार की उम्र कम से कम 21 वर्ष होनी चाहिए। यानी 21 साल से कम उम्र का व्यक्ति मुखिया पद का चुनाव नहीं लड़ सकता। चुनाव के लिए निर्धारित तारीख तक उम्मीदवार की उम्र संबंधित कानूनी शर्तों को पूरा करना जरूरी है।
पंचायत की मतदाता सूची में नाम होना जरूरी
मुखिया या पंचायत के किसी अन्य निर्वाचित पद के लिए उम्मीदवार का संबंधित पंचायत की मतदाता सूची में नाम होना जरूरी है। इसके साथ ही उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना भी आवश्यक है।
सरकारी कर्मचारी चुनाव लड़ सकते हैं या नहीं ?
सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्ति के लिए पंचायत चुनाव लड़ने पर कानूनी प्रतिबंध हो सकता है। सरकारी कर्मचारी और पंचायत के अधीन लाभ का पद रखने वाले व्यक्ति पद पर रहते हुए चुनाव नहीं लड़ सकते। इसी तरह कुछ सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों पर भी संबंधित नियमों के तहत चुनाव लड़ने को लेकर प्रतिबंध लागू हो सकता है। ऐसे व्यक्ति चुनाव लड़ना चाहते हैं तो उन्हें पहले अपने पद से संबंधित कानूनी शर्तों को पूरा करना होगा।
मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित व्यक्ति नहीं लड़ सकता चुनाव
अगर किसी व्यक्ति को सक्षम अदालत द्वारा मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित किया गया है, तो वह पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो सकता है। हालांकि, किसी उम्मीदवार की अयोग्यता का अंतिम निर्धारण संबंधित कानून और चुनाव नियमों के तहत किया जाता है।
गंभीर अपराध में सजा पाने पर भी लग सकती है रोक
गंभीर अपराध में निर्धारित सजा पाने वाले व्यक्ति पर भी पंचायत चुनाव लड़ने को लेकर अयोग्यता लागू हो सकती है। यह अयोग्यता अपराध की प्रकृति, सजा और संबंधित चुनाव कानून में निर्धारित प्रावधानों पर निर्भर करती है। इसलिए ऐसे मामलों में उम्मीदवार को नामांकन से पहले लागू नियमों की जांच करना बहुत जरूरी है।
आरक्षित सीट पर भी जरूरी है पात्रता
पंचायत चुनाव में कई सीटें अलग-अलग आरक्षित वर्गों के लिए निर्धारित होती हैं। अगर कोई उम्मीदवार आरक्षित सीट से चुनाव लड़ना चाहता है, तो उसे उस वर्ग से संबंधित आवश्यक पात्रता पूरी करनी होगी।आरक्षण से जुड़े प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज भी नामांकन के दौरान महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
परिसीमन के बाद बदल सकता है चुनावी गणित
बिहार में आगामी पंचायत चुनाव से पहले 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किए जाने की बात सामने आई है। आबादी के आधार पर पंचायतों और वार्डों का गठन होने के बाद सीटों की संख्या और आरक्षण का गणित भी बदल सकता है। वर्तमान में बिहार में करीब 8,053 मुखिया पद हैं। परिसीमन के बाद इनकी संख्या बढ़कर करीब 13 हजार तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।इससे पंचायत चुनाव में दावेदारों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
चुनाव से पहले नियमों की जांच जरूरी
मुखिया का चुनाव लड़ने से पहले उम्मीदवार को अपनी उम्र, मतदाता सूची में नाम, नागरिकता, सरकारी सेवा से जुड़ी स्थिति, आपराधिक मामले और आरक्षित सीट की पात्रता जैसे सभी बिंदुओं की जांच कर लेनी चाहिए। इसके साथ ही नामांकन के समय लागू बिहार पंचायत चुनाव कानून और निर्वाचन आयोग के नवीनतम दिशा-निर्देशों का पालन करना भी जरूरी होगा।




