पटना, 8 अगस्त 2026। बिहार के सरकारी स्कूलों में मिड डे-मील यानी पोषाहार योजना की निगरानी अब डिजिटल तरीके से की जाएगी। शिक्षा विभाग ने ई-शिक्षाकोष एप का नया वर्जन 3.6.0 लॉन्च किया है। नई व्यवस्था के तहत बच्चों की वास्तविक उपस्थिति दर्ज करने के लिए फेस स्कैनिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा का इस्तेमाल किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य मिड डे-मील में फर्जीवाड़े, गलत छात्र संख्या दर्ज करने और राशन की गड़बड़ी पर रोक लगाना है। मालूम हो कि बिहार के करीब 1.09 करोड़ बच्चों को मिलने वाले पोषाहार का रिकॉर्ड अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जाएगा।
11 बजे तक अपलोड करना होगा डेटा
नई व्यवस्था के तहत सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को प्रत्येक दिन सुबह 11 बजे तक छात्रों की उपस्थिति और मिड डे-मील से जुड़ी जरूरी जानकारी ई-शिक्षाकोष एप पर अपलोड करनी होगी।इसमें स्कूल में मौजूद बच्चों की संख्या, भोजन करने वाले छात्रों की संख्या और भोजन की गुणवत्ता से संबंधित जानकारी शामिल होगी। निर्धारित समय तक डेटा अपलोड नहीं करने वाले प्रधानाध्यापकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
बच्चों की संख्या के लिए फेस स्कैनिंग
ई-शिक्षाकोष के नए वर्जन में फेस स्कैनिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा जोड़ी गई है। इसके जरिए स्कूल में मौजूद बच्चों की वास्तविक संख्या का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अब केवल रजिस्टर में छात्रों की संख्या दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा। वास्तविक उपस्थिति के आधार पर मिड डे-मील की जरूरत और राशन का हिसाब तय किया जाएगा।
वास्तविक छात्रों की संख्या के आधार पर मिलेगा राशन
नई डिजिटल व्यवस्था का असर राशन की आपूर्ति पर भी पड़ेगा। स्कूल में जितने बच्चे वास्तव में मौजूद होंगे, उसी आधार पर पोषाहार के लिए राशन की आवश्यकता निर्धारित की जाएगी। इससे अधिक छात्र संख्या दिखाकर अतिरिक्त राशन या राशि लेने की संभावना कम करने में मदद मिलेगी।
फर्जीवाड़े पर रोक लगाने की तैयारी
मिड डे-मील व्यवस्था में कई बार वास्तविक उपस्थिति से अधिक बच्चों की संख्या दर्ज किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। मगर अह नई डिजिटल प्रणाली के जरिए शिक्षा विभाग स्कूलों में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति और भोजन वितरण का रिकॉर्ड ऑनलाइन रखने की तैयारी कर रहा है। वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल डेटा के जरिए जरूरत पड़ने पर स्कूल स्तर पर दर्ज जानकारी की जांच भी की जा सकेगी। जिससे इसमें किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना नहीं रहे।
मिड डे-मील की निगरानी होगी डिजिटल
शिक्षा विभाग का लक्ष्य पोषाहार व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना है। नए एप के माध्यम से छात्रों की उपस्थिति, भोजन करने वाले बच्चों की संख्या और भोजन की गुणवत्ता जैसी जानकारियां डिजिटल रूप से दर्ज की जाएंगी। अगर यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो बिहार के सरकारी स्कूलों में मिड डे-मील के नाम पर होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाने में काफी हद तक मदद मिल सकती है।




