पटना, 10 अगस्त 2026। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा है कि शिक्षा अधिकारियों को आम जनता से सीधा जुड़ाव बढ़ाना होगा। अधिकारियों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए, जिससे शिक्षकों और आम लोगों के बीच शिक्षा विभाग के प्रति विश्वास पैदा हो। उन्होंने कहा कि जनता के बीच विश्वास कायम करना ही शिक्षा विभाग का सबसे बड़ा संकल्प होना चाहिए। शिक्षा मंत्री सोमवार को पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित दो दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला सह चिंतन शिविर के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, विद्यार्थियों को कौशलयुक्त बनाने, अधिकारियों की जवाबदेही और विद्यालयों के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं।

गांव-गांव जाकर जनता से जुड़ेंगे शिक्षा अधिकारी

मिथिलेश तिवारी ने कहा कि शिक्षा अधिकारियों को केवल सरकार के भरोसे काम करने के बजाय जन सहयोग से समस्याओं का समाधान निकालने की क्षमता विकसित करनी होगी। इसके लिए अधिकारियों को गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद करना होगा और जनप्रतिनिधियों से दूरी कम करनी होगी। उन्होंने बताया कि अधिकारियों के लिए एक सप्ताह तक घर से बाहर रहकर जनता के बीच रहने का अभियान चलाने पर भी विचार किया जा रहा है।

छठी से 12वीं तक बच्चों को कौशलयुक्त बनाने की तैयारी

शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार में छठी कक्षा से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों को कौशलयुक्त बनाने के लिए एक महीने के भीतर योजना तैयार की जाएगी। स्कूलों में वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ रोजगारपरक कौशल भी हासिल हो सके। उन्होंने कहा कि आज रोजगार के अवसर मौजूद हैं, लेकिन केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को रोजगार के लिए जरूरी कौशल से लैस करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

हर प्रखंड में बनेगा समेकित विद्यालय और गुरुकुलम

मिथिलेश तिवारी ने कहा कि जल्द ही बिहार के हर प्रखंड में समेकित विद्यालय और गुरुकुलम स्थापित करने की योजना है। इन संस्थानों में वेद-विज्ञान, कौशल विकास समेत विभिन्न विषयों की पढ़ाई कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना की शुरुआत बक्सर से की जाएगी।

स्वास्थ्य और अन्य विभागों को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा जाएगा

शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यालयों और विद्यार्थियों से जुड़ी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करने के लिए स्वास्थ्य, पीएचईडी, राजस्व एवं भूमि सुधार सहित अन्य विभागों को शिक्षा विभाग से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल भवन नहीं हैं, बल्कि भविष्य निर्माण के केंद्र हैं और शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की आत्मा हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि बिहार की बेटियों ने कई क्षेत्रों में बेटों को पीछे छोड़ा है। सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं से बेटियों की शिक्षा और उनके आगे बढ़ने की गति को और मजबूती मिली है।

उर्दू और संस्कृत दोनों को मिलेगा बढ़ावा

शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार में उर्दू और संस्कृत दोनों भाषाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मदरसों के माध्यम से उर्दू शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाएगा, वहीं संस्कृत के विकास पर भी ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी भाषाओं और विषयों के विकास को शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान दिया जाएगा।

13 जिलों से मिली अनियमितता की शिकायत

शिक्षा विभाग में अनियमितता को लेकर मंत्री ने सख्त रुख अपनाया। अधिकारियों के अधिकारों में कटौती से संबंधित चर्चा पर उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर ध्यान देगी, लेकिन किसी को भी अनियमितता या लूट की छूट नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि 13 जिलों से अनियमितता की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। संबंधित अधिकारियों को इन शिकायतों का तत्काल समाधान करने का निर्देश दिया गया है। शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

हर छह महीने में होगी राज्यस्तरीय चिंतन कार्यशाला

मिथिलेश तिवारी ने कहा कि अब हर छह महीने में इसी तरह की राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। अगली कार्यशाला गया या वाल्मीकिनगर में आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है। वहीं, सरस्वती विद्या निकेतन के रूप में स्थापित मॉडल स्कूलों के प्राचार्यों के लिए पटना के ज्ञान भवन में अलग कार्यशाला आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन्हीं मॉडल स्कूलों से भविष्य की प्रतिभाओं को तराशने का काम किया जाएगा।

17 अगस्त तक तिरंगा यात्रा में शामिल होने की अपील

शिक्षा मंत्री ने सभी अधिकारियों और शिक्षकों से 17 अगस्त तक अपने-अपने जिलों में बच्चों और शिक्षकों के साथ तिरंगा यात्रा में भाग लेने की अपील की। उन्होंने अधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि वे यहां से यह संकल्प लेकर जाएं कि शिक्षा विभाग को लेकर कहीं से कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए। अधिकारियों का व्यवहार पारदर्शी हो और शिक्षकों का स्थानांतरण निर्धारित नियमावली के आधार पर ही किया जाए। कार्यशाला के समापन पर शिक्षा मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों के साथ अपना संबोधन समाप्त किया—

“छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता,
टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।”