पटना | 8 अगस्त 2026

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में अंदरूनी मतभेद और असंतोष को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के कुछ पुराने और समर्पित नेताओं की ओर से तेजस्वी यादव के फैसलों और उनके करीबी सलाहकारों को लेकर नाराजगी सामने आने का दावा किया जा रहा है। संगठन की कई इकाइयों को भंग करने के फैसले के बाद पार्टी के भीतर उठ रही आवाजों ने इस चर्चा को और हवा दे दी है।

तेजस्वी के फैसलों पर पार्टी के भीतर सवाल

राजद में संगठन और नेतृत्व को लेकर असंतोष की चर्चा कोई नई नहीं है। पार्टी के भीतर कई नेताओं ने अलग-अलग समय पर नेतृत्व के फैसलों और संगठनात्मक कामकाज को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। संगठन की इकाइयों को भंग करने के तेजस्वी यादव के हालिया फैसले पर उनकी बहन रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। उन्होंने इस कदम को पहले ही उठाए जाने की बात कही थी।

तेज प्रताप के अलग होने से बढ़ी थी दूरी

राजद परिवार में भी नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। तेज प्रताप यादव ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व और उनके आसपास मौजूद लोगों को लेकर कई बार सवाल उठाए थे। बाद में उन्होंने राजद से अलग होकर जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान तेज प्रताप की पार्टी ने राजद के खिलाफ उम्मीदवार उतारने की कोशिश की। उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद तेज प्रताप यादव ने राजद के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर का समर्थन किया था।

रोहिणी आचार्य भी सलाहकारों पर उठा चुकी हैं सवाल

रोहिणी आचार्य भी तेजस्वी यादव के करीबी सलाहकारों को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं। उन्होंने संजय यादव और रमीज को लेकर पार्टी संगठन पर प्रभाव और नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए थे। अब संगठन की इकाइयों को भंग किए जाने के फैसले के बाद उनकी प्रतिक्रिया को भी राजद के भीतर चल रही बहस से जोड़कर देखा जा रहा है।

पार्टी नेताओं के बीच भी दिख रहा मतभेद

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान जहानाबाद सांसद सुरेंद्र यादव की ओर से राजद उम्मीदवार को लेकर दिए गए बयान ने भी पार्टी के भीतर मतभेद की चर्चा को हवा दी थी। वहीं, राजद नेता भाई वीरेंद्र और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति यादव के बीच बयानबाजी भी सार्वजनिक रूप से सामने आई। दोनों नेताओं की टिप्पणियों के बाद पार्टी के भीतर समन्वय और अनुशासन को लेकर सवाल उठे।

अर्जुन राय और मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे से भी चर्चा तेज

लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री और पूर्व सांसद अर्जुन राय ने राजद छोड़ने का ऐलान करते हुए तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से दूर हो रही है। वहीं, हाल में पार्टी छोड़ने वाले मृत्युंजय तिवारी ने भी संगठन के भीतर खुद को अपमानित महसूस करने की बात कही थी। उन्होंने पार्टी में पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के सम्मान को लेकर सवाल उठाए।

नेतृत्व और संगठन के बीच तालमेल पर सवाल

राजद के भीतर उठ रहे असंतोष के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें नेतृत्व की कार्यशैली, संगठनात्मक फैसले, पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और सलाहकारों का प्रभाव प्रमुख मुद्दे बताए जा रहे हैं। हालांकि, पार्टी नेतृत्व की ओर से इन सभी दावों और आरोपों पर एक समान आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि राजद अपने संगठन में उठ रही असंतोष की आवाजों को किस तरह संभालता है। आने वाले दिनों में पार्टी के संगठनात्मक फैसले और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका बिहार की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन सकती है।