पटना, 7 अगस्त 2026 : राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के लिए फिलहाल राहत की खबर है। उनके बेटे और बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद (MLC) का मनोनीत सदस्य बना दिया गया है। इससे उनका मंत्री पद फिलहाल सुरक्षित हो गया है। हालांकि यह राहत स्थायी नहीं है, क्योंकि उनका कार्यकाल केवल मार्च 2027 तक रहेगा।

मार्च 2027 के बाद फिर खड़ा हो सकता है संकट

दीपक प्रकाश का मौजूदा MLC कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त हो जाएगा। यदि उन्हें उसके बाद भी मंत्री बने रहना है, तो दोबारा विधान परिषद की सदस्यता सुनिश्चित करनी होगी। ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा को फिर से राजनीतिक समीकरण साधने पड़ सकते हैं।

बीजेपी के साथ बढ़ सकती है राजनीतिक खींचतान

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले महीनों में बीजेपी, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अपने दल में विलय का दबाव बढ़ा सकती है। ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा के सामने पार्टी की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने और सत्ता में हिस्सेदारी कायम रखने की दोहरी चुनौती होगी।

अपनी पार्टी के भीतर भी संतुलन की चुनौती

RLM के पास फिलहाल चार विधायक हैं, जिनमें उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता कुशवाहा भी शामिल हैं। पहले भी पार्टी के कुछ विधायकों की नाराजगी सामने आ चुकी है। दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने के बाद असंतोष की स्थिति बनी थी, जिसे बाद में संगठनात्मक जिम्मेदारियां देकर शांत कराया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में भी जारी है मामला

दीपक प्रकाश को बिना किसी सदन का सदस्य बने दोबारा मंत्री बनाए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। अदालत ने सरकार से जवाब भी मांगा था। अब MLC बनने के बाद सरकार के पास अदालत में यह तर्क रहेगा कि वह सदन के सदस्य हैं। हालांकि, यह कानूनी विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा रहा। अदालत यह भी देख सकती है कि क्या वे निर्धारित समय सीमा से अधिक अवधि तक बिना सदन की सदस्यता के मंत्री रहे थे।

बीजेपी ने खाली कराई सीट

सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले बीजेपी के एक MLC के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश को मनोनीत किया गया। इससे फिलहाल उनके मंत्री पद पर मंडरा रहा संकट टल गया है।

आगे क्या होगा ?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मार्च 2027 से पहले उपेंद्र कुशवाहा को फिर से राजनीतिक रणनीति बनानी होगी। यदि RLM का बीजेपी में विलय नहीं होता या नई MLC सीट नहीं मिलती, तो दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर दोबारा संकट खड़ा हो सकता है।