समस्तीपुर/नई दिल्ली, 5 अगस्त 2026 : समस्तीपुर भाजपा अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) मोर्चा के जिलाध्यक्ष हीरा पासवान को दिल्ली पुलिस ने कथित जमीन फर्जीवाड़े के मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले एक वर्ष से फरार चल रहा था और ओडिशा के कटक में पहचान बदलकर रह रहा था। तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय इनपुट की मदद से उसकी लोकेशन ट्रैक कर गिरफ्तारी की गई। अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है।
285 गज जमीन के कथित फर्जी सौदे का आरोप
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, मामला पश्चिमी दिल्ली के जय विहार (बापरोला) क्षेत्र में स्थित 285 गज जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि हीरा पासवान और उसके बेटे राजा पासवान ने जमीन के वास्तविक मालिक उमेश सिंह के कथित फर्जी हस्ताक्षर कर जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) तैयार करवाई।जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी कथित फर्जी दस्तावेज के आधार पर पिंकी देवी, पंकज कुमार और सीमा देवी के साथ खरीद-बिक्री के नाम पर करीब दो करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।
कटक में छिपकर कर रहा था काम
पुलिस के अनुसार, मामला दर्ज होने के बाद हीरा पासवान दिल्ली छोड़कर ओडिशा के कटक चला गया था। वहां उसने कथित तौर पर अपनी पहचान छिपाकर लेबर कॉन्ट्रैक्टर के रूप में काम शुरू कर दिया। तकनीकी निगरानी के जरिए उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई और इस बीच छापेमारी कर उसे वहां से गिरफ्तार कर लिया गया।
अदालत ने भेजा तिहाड़ जेल
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को दिल्ली की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजते हुए तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया। पुलिस अब मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
बेटे की भूमिका भी जांच के दायरे में
दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच में हीरा पासवान के बेटे राजा पासवान की भूमिका भी सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे और इस नेटवर्क के माध्यम से कितने लोगों को कथित तौर पर ठगा गया। भाजपा एससी-एसटी मोर्चा के जिलाध्यक्ष हीरा पासवान की गिरफ्तारी के बाद समस्तीपुर जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक इस मामले पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। उधर,दिल्ली पुलिस का इस मामले को लेकर कहना है कि जांच अभी जारी है और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।




