पटना, 7 अगस्त 2026 : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अगले दो वर्षों में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता इतनी बेहतर कर दी जाएगी कि मंत्री, विधायक और जिला स्तर के अधिकारियों के बच्चे भी इन्हीं स्कूलों में पढ़ाई के लिए दाखिला लेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव का पैमाना होगा।
दो साल में बदल जाएगी सरकारी स्कूलों की तस्वीर
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार सरकारी विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से लैस करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उनका कहना था कि जब जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के परिवार भी सरकारी स्कूलों पर भरोसा करेंगे, तभी शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार माना जाएगा।
सरकारी स्कूलों में NEET और JEE की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजना सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी उपलब्ध कराने की है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के लिए NEET और JEE जैसी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निजी संस्थानों पर निर्भर न रहना पड़े।
15 अगस्त से शुरू होगी लाइव टीचर सुविधा
सम्राट चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार "लाइव टीचर" सुविधा शुरू करने जा रही है। इसके तहत यदि किसी छात्र को देर रात भी पढ़ाई के दौरान किसी विषय में कठिनाई आती है, तो वह मोबाइल या लैपटॉप के माध्यम से शिक्षक से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस व्यवस्था को 15 अगस्त से लागू करने की तैयारी है, जिससे सरकारी स्कूलों के छात्रों को डिजिटल माध्यम से शिक्षकों की सहायता मिल सके।
गरीब छात्रों को मिलेगा तकनीकी सहयोग
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे महंगे स्कूलों या कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई नहीं कर पाते। नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विशेषज्ञ शिक्षकों का सहयोग उपलब्ध कराना है, ताकि वे भी प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
शिक्षा सुधार पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं, आधुनिक शिक्षण व्यवस्था और डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा और अधिक से अधिक परिवार अपने बच्चों का नामांकन सरकारी विद्यालयों में कराना पसंद करेंगे।




