पटना, 6 अगस्त 2026: अनुकंपा नियुक्ति को लेकर पटना हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, तो केवल इस आधार पर दूसरे आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती कि नौकरी करने वाला सदस्य अलग रहता है या परिवार का आर्थिक सहयोग नहीं करता।
क्या कहा पटना हाई कोर्ट ने ?
न्यायमूर्ति कुमार मनीष की एकलपीठ ने दरभंगा निवासी अजीत कुमार मंडल की याचिका खारिज करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई उत्तराधिकार का अधिकार नहीं है। इसका उद्देश्य केवल कर्मचारी की असमय मृत्यु के बाद उत्पन्न गंभीर आर्थिक संकट से परिवार को तत्काल राहत देना है। अदालत ने कहा कि यदि परिवार में पहले से कोई सदस्य सरकारी सेवा में है, तो सामान्य परिस्थितियों में दूसरे सदस्य को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का प्रावधान नहीं बनता।
क्या था पूरा मामला ?
दरभंगा जिले के निवासी अजीत कुमार मंडल के बड़े भाई किरतपुर प्रखंड कार्यालय में अनुसेवक (चपरासी) के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2012 में सेवा के दौरान उनके निधन के बाद अजीत कुमार मंडल ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। हालांकि वर्ष 2016 में जिला अनुकंपा नियुक्ति समिति ने उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि परिवार का एक अन्य सदस्य पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत है।
याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी ?
अजीत कुमार मंडल ने हाई कोर्ट में दलील दी कि सरकारी नौकरी करने वाला उनका दूसरा भाई अलग रहता है और परिवार की आर्थिक सहायता नहीं करता। इसलिए उन्हें अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मिलना चाहिए।
राज्य सरकार ने क्या कहा ?
राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने संबंधित सरकारी नियमों और प्रावधानों का हवाला देते हुए समिति के फैसले का समर्थन किया। सरकार का कहना था कि परिवार में पहले से सरकारी कर्मचारी मौजूद होने के कारण अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता।
हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका ?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि :
परिवार का एक सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है।
परिवार की अत्यंत दयनीय आर्थिक स्थिति का कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
जिला अनुकंपा नियुक्ति समिति का वर्ष 2016 का फैसला नियमों के अनुरूप था।
इन्हीं आधारों पर हाई कोर्ट ने अजीत कुमार मंडल की याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट की टिप्पणी क्यों है अहम ?
यह फैसला भविष्य में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य रोजगार देना नहीं, बल्कि असमय मृत्यु के कारण उत्पन्न आर्थिक संकट से परिवार को तत्काल राहत प्रदान करना है। इसलिए इसे उत्तराधिकार या वैधानिक अधिकार के रूप में नहीं देखा जा सकता।




