रियाद/अबू धाबी, 17 अगस्त 2026 : तुर्की और पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब की नई सुरक्षा साझेदारी को लेकर खाड़ी के दो अहम देशों सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। UAE के विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि जब खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) पहले से मौजूद है, तो रियाद को उसके बाहर जाकर नई सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी। वहीं, सऊदी विशेषज्ञों ने भारत और इजरायल के साथ UAE के सुरक्षा सहयोग पर भी सवाल खड़े किए हैं।
मक्का समझौते से क्यों बढ़ी सऊदी-UAE की दूरी ?
तुर्की की पहल वाले मक्का डिफेंस पैक्ट में कई इस्लामिक देशों को शामिल करने की चर्चा के बीच सऊदी अरब और UAE के बीच रणनीतिक मतभेद चर्चा में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब तुर्की और पाकिस्तान के साथ सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ा रहा है, जबकि UAE ने भारत और इजरायल के साथ अपने रणनीतिक एवं सुरक्षा संबंध मजबूत किए हैं। इस नई खेमेबंदी को लेकर खाड़ी क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच भी बहस तेज हो गई है।
UAE के एक्सपर्ट ने सऊदी से पूछा- GCC काफी नहीं ?
UAE के राजनीतिक विश्लेषक और अबू धाबी के प्रभावशाली लोगों में गिने जाने वाले अब्दुलखालिक अब्दुल्ला ने सऊदी की नई सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका तर्क है कि खाड़ी देशों के बीच सैन्य और राजनीतिक सहयोग मजबूत करना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने सवाल किया कि जब GCC के पास पहले से साझा सुरक्षा ढांचा मौजूद है, तो रियाद को तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों को शामिल कर नई व्यवस्था बनाने की जरूरत क्यों पड़ी।
सऊदी पक्ष ने भी दिया तीखा जवाब
UAE के विशेषज्ञ की आलोचना पर सऊदी राजकुमार अब्दुल रहमान बिन मुसैद ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सऊदी अरब के अपने रणनीतिक हितों के अनुसार दूसरे देशों के साथ समझौते करने के अधिकार का बचाव किया। इसके बाद रियाद स्थित असबार सेंटर फॉर स्टडीज एंड रिसर्च के चेयरमैन फहद अल-अरबी अल-हारथी ने भी मक्का समझौते का बचाव किया। उनके मुताबिक, यह किसी एक दुश्मन के खिलाफ बनाया गया गठबंधन नहीं है, बल्कि सामूहिक सुरक्षा और संभावित खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ाने का प्रयास है।
यमन ने पहले ही बढ़ाई थी सऊदी-UAE की दूरी
सऊदी अरब और UAE के बीच मतभेद कोई नए नहीं हैं। यमन के गृहयुद्ध में दोनों देशों के रुख अलग-अलग रहे हैं। सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का समर्थन किया, जबकि UAE ने दक्षिणी अलगाववादी संगठन STC का समर्थन किया। यही मतभेद दोनों देशों की क्षेत्रीय रणनीति में अलग-अलग प्राथमिकताओं को दिखाते हैं।
सऊदी एक्सपर्ट्स ने भारत-इजरायल पर उठाए सवाल
बहस आगे बढ़ने के बाद सऊदी टिप्पणीकारों ने UAE की भारत और इजरायल के साथ सुरक्षा साझेदारी को निशाने पर लिया। इस्लामिक वर्ल्ड एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन के पूर्व प्रमुख अब्दुलअजीज अल-तुवैजरी ने सवाल उठाया कि अगर UAE के लिए भारत और इजरायल के साथ रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग स्वीकार्य है, तो सऊदी अरब के तुर्की और पाकिस्तान के साथ सुरक्षा समझौते पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं ? इस बयान के बाद विवाद का दायरा केवल सऊदी-UAE संबंधों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत और इजरायल के साथ UAE के रिश्ते भी बहस के केंद्र में आ गए।
पाकिस्तान-तुर्की के करीब सऊदी, भारत-इजरायल के साथ UAE ?
पूरे घटनाक्रम से खाड़ी और पश्चिम एशिया में बदलती रणनीतिक तस्वीर के संकेत मिल रहे हैं। एक तरफ सऊदी अरब तुर्की और पाकिस्तान के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वहीं UAE भारत और इजरायल के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत कर रहा है। ऐसे में मक्का डिफेंस पैक्ट सिर्फ एक नया सुरक्षा समझौता नहीं, बल्कि क्षेत्र में बदलते रणनीतिक समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है। हालांकि, सऊदी अरब और UAE के बीच मतभेद कितनी दूर तक जाते हैं, यह आने वाले समय में दोनों देशों की नीतियों से स्पष्ट होगा।




