इस्लामाबाद, 15 अगस्त 2026 : 1999 का कारगिल युद्ध भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे अहम अध्यायों में गिना जाता है। पाकिस्तानी सैनिकों की घुसपैठ के बाद भारतीय सेना ने जमीन पर ऑपरेशन विजय और भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के जरिए करारा जवाब दिया था। बेहद ऊंचाई और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच भारतीय सेनाओं ने रणनीतिक चोटियों पर दोबारा कब्जा हासिल किया।कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने चीन से मदद की उम्मीद भी लगाई थी। उपलब्ध विवरणों के मुताबिक, पाकिस्तान के तत्कालीन सैन्य नेतृत्व और बाद में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने बीजिंग से हस्तक्षेप और समर्थन की अपील की मगर चीन ने उस समय पाकिस्तान की मदद करने से साफ-साफ इनकार कर दिया था।

कैसे शुरू हुआ कारगिल युद्ध ?

1999 में नियंत्रण रेखा यानी LoC के भारतीय हिस्से की ऊंची पहाड़ियों पर पाकिस्तानी सैनिकों ने घुसपैठ कर कई रणनीतिक स्थानों पर कब्जा कर लिया। पाकिस्तान ने इन सैनिकों को मुजाहिदीन के रूप में पेश करने की कोशिश की, लेकिन बाद में उनकी सैन्य भागीदारी स्पष्ट हुई। भारतीय सेना ने घुसपैठ का पता चलने के बाद बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया। ऊंचाई पर मौजूद पाकिस्तानी ठिकानों को खाली कराने के लिए जमीन के साथ-साथ वायुसेना का भी इस्तेमाल किया गया।

ऑपरेशन सफेद सागर ने बदली जंग की दिशा

कारगिल संघर्ष में भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के तहत ऊंचाई वाले इलाकों में महत्वपूर्ण हवाई अभियान चलाया। चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों के बीच वायुसेना ने पाकिस्तानी ठिकानों को निशाना बनाने और भारतीय सेना के अभियान को समर्थन देने में भूमिका निभाई। दूसरी ओर, भारतीय थल सेना ने ऑपरेशन विजय के जरिए एक-एक कर रणनीतिक चोटियों को वापस हासिल किया।

पाकिस्तान ने चीन से क्यों मांगी मदद ?

कारगिल युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने के बीच पाकिस्तान ने चीन से सैन्य और राजनयिक समर्थन हासिल करने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन पाकिस्तानी सैन्य शासक जनरल परवेज मुशर्रफ ने बीजिंग जाकर भारत के खिलाफ समर्थन की अपील की थी। लेकिन चीन ने उस समय पाकिस्तान की सैन्य मदद करने से दूरी बनाए रखी। चीन की ओर से पाकिस्तान को नियंत्रण रेखा का सम्मान करने और अपने सैनिकों को पीछे हटाने का संदेश दिया गया।

नवाज शरीफ भी पहुंचे थे बीजिंग

पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने जून 1999 में चीन का दौरा किया। उन्होंने चीनी नेतृत्व से कारगिल संकट में हस्तक्षेप की अपील की। हालांकि चीन ने इस अपील को स्वीकार नहीं किया। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने के साथ पाकिस्तान को कारगिल क्षेत्र से अपनी सेनाएं वापस बुलानी पड़ीं।

करीब 16,500 फीट की ऊंचाई पर थी लड़ाई

कारगिल युद्ध का बड़ा हिस्सा बेहद ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में लड़ा गया। कई रणनीतिक स्थान लगभग 16,500 फीट तक की ऊंचाई पर थे। ऐसे इलाकों में भारतीय सैनिकों के लिए लड़ाई बेहद चुनौतीपूर्ण थी। इसके बावजूद भारतीय सेना ने लगातार अभियान चलाकर कब्जे वाली चोटियों को वापस हासिल किया। वायुसेना के ऑपरेशन सफेद सागर ने भी थल सेना के अभियान को महत्वपूर्ण हवाई समर्थन दिया।

कारगिल युद्ध में भारत की जीत

लगभग दो महीने से अधिक चले कारगिल संघर्ष का अंत भारत की सैन्य सफलता के साथ हुआ। भारतीय सेना ने घुसपैठियों को पीछे हटने के लिए मजबूर किया और रणनीतिक चोटियों पर दोबारा नियंत्रण स्थापित किया। कारगिल युद्ध के बाद भारत की सैन्य रणनीति और संयुक्त अभियान क्षमता को लेकर भी कई महत्वपूर्ण सबक सामने आए।

चीन-पाकिस्तान संबंधों में बाद में बढ़ी नजदीकी

कारगिल युद्ध के दौरान चीन का रुख पाकिस्तान की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। हालांकि, इसके बाद के वर्षों में चीन और पाकिस्तान के रणनीतिक, आर्थिक और सैन्य संबंध लगातार मजबूत हुए। आज दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी काफी गहरी है, लेकिन 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान चीन द्वारा पाकिस्तान को खुला सैन्य समर्थन न देना उस समय की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटना के रूप में देखा जाता है।