काहिरा/नई दिल्ली, 14 अगस्त 2026 : पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के प्रस्तावित सैन्य गठबंधन से मिस्र ने दूरी बनाए रखी है। इसी बीच भारत और मिस्र के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, फिनटेक और इनोवेशन को लेकर भी बातचीत हुई है। इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच मिस्र ने किसी नए सैन्य गुट में शामिल होने से फिलहाल मना कर दिया है। इसी बीच भारत और मिस्र के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। 12 अगस्त को जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के दौरान भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और मिस्र के वित्त मंत्री अहमद कौचुक के बीच मुलाकात हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के निपटान, फिनटेक और इनोवेशन जैसे अहम मुद्दों पर एक सकारात्मक चर्चा हुई।

पाकिस्तान-तुर्की के गठबंधन से मिस्र ने बनाई दूरी

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच सैन्य सहयोग को लेकर बने नए समीकरण में मिस्र को भी शामिल होने का निमंत्रण दिए जाने की चर्चा है। हालांकि, मिस्र ने फिलहाल किसी सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनने से इनकार किया है। मिस्र का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में कई देशों के बीच रणनीतिक और सैन्य गठजोड़ तेजी से बदल रहे हैं। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में मिस्र भी इस गठबंधन का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, फिलहाल काहिरा ने इस दिशा में कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है।

भारत-मिस्र के बीच लोकल करेंसी ट्रेड पर बातचीत

भारत और मिस्र के बीच हुई बातचीत का एक प्रमुख मुद्दा स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का निपटान रहा। इसका मतलब है कि दोनों देशों के कारोबारी भविष्य में रुपये और मिस्री पाउंड जैसी स्थानीय मुद्राओं के जरिए लेन-देन करने के विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में किसी तीसरी मुद्रा पर निर्भरता कम करने और भुगतान की लागत घटाने में मदद मिल सकती है। भारत पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। BRICS देशों के बीच भी सीमा-पार भुगतान को आसान बनाने और लेन-देन की लागत कम करने के विकल्पों पर चर्चा चल रही है।

फिनटेक और इनोवेशन में भी सहयोग

भारत और मिस्र के बीच बातचीत सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रही। दोनों पक्षों ने फिनटेक और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की। डिजिटल भुगतान और वित्तीय तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता को देखते हुए दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

मिस्र के लिए भारत और UAE क्यों महत्वपूर्ण ?

मिस्र के भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ पहले से आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में काहिरा किसी सैन्य गुट में शामिल होने के बजाय अपने आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को प्राथमिकता देने की रणनीति अपना सकता है। UAE और मिस्र के बीच भी मजबूत आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में भारत और UAE के साथ सहयोग को आगे बढ़ाना मिस्र के लिए निवेश, व्यापार और वित्तीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

इजरायल से रिश्ते भी हैं अहम

मिस्र के किसी सैन्य गठबंधन से दूर रहने के पीछे उसके क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। मिस्र की इजरायल के साथ सीमा है और दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनयिक संबंध हैं। वहीं, UAE के साथ मिस्र के करीबी संबंध हैं। ऐसे में तुर्की के नेतृत्व वाले किसी नए सैन्य गुट में शामिल होना काहिरा के मौजूदा क्षेत्रीय संबंधों को प्रभावित कर सकता है।

पश्चिम एशिया में बदल रहा रणनीतिक समीकरण

मिस्र का सैन्य गठबंधन से दूरी बनाना और भारत के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाना पश्चिम एशिया में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि मिस्र भविष्य में किसी सैन्य गठबंधन में शामिल होगा या नहीं। लेकिन भारत के साथ स्थानीय मुद्रा व्यापार और फिनटेक सहयोग पर हुई बातचीत से यह जरूर संकेत मिलता है कि काहिरा आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर खास जोर दे रहा है।