ढाका, 28 अगस्त 2026 : बांग्लादेश में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के साथ प्रस्तावित ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ को लेकर चर्चा एकबार फिर तेज हो गई है। इसी बीच राजशाही यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस पढ़ाने वाले विशेषज्ञ मो. शरीफुल इस्लाम ने बांग्लादेश को इस समझौते में शामिल होने से पहले सावधानी बरतने की एक खास सलाह दी है। उन्होंने एक लेख में कहा कि विदेश नीति से जुड़े फैसले भावनाओं के बजाय तथ्यों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर लिए जाने चाहिए। विशेषज्ञ ने बांग्लादेश के लिए इस समझौते से दूर रहने के पांच प्रमुख कारण गिनाए हैं।
1. बांग्लादेश को आखिर किस देश से खतरा है ?
विशेषज्ञ के मुताबिक किसी भी रक्षा समझौते में शामिल होने का सबसे अहम आधार देश की सुरक्षा जरूरत और संभावित खतरा होता है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की अपनी-अपनी सुरक्षा चुनौतियों का हवाला दे सकते हैं, लेकिन बांग्लादेश के सामने फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट सैन्य खतरा नहीं है, जिसके लिए उसे इस तरह के सैन्य गठबंधन की अचानक जरूरत पड़े।
2. क्या भारत के खिलाफ युद्ध में उतरेगा बांग्लादेश ?
मक्का समझौते की सामूहिक रक्षा व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल भारत को लेकर उठाया गया है। यदि भविष्य में भारत और पाकिस्तान के बीच कोई सैन्य संघर्ष होता है और समझौते के तहत एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है, तो क्या बांग्लादेश भी इसमें शामिल होगा ? विशेषज्ञ का कहना है कि भारत के साथ बांग्लादेश के पानी, व्यापार और सीमा से जुड़े कुछ मुद्दे जरूर हैं, लेकिन इन्हें सैन्य टकराव के बजाय कूटनीति से हल किया जाना ज्यादा फायदेमंद होगा।
3. खाड़ी देशों के साथ संतुलित संबंध जरूरी
बांग्लादेश के लाखों प्रवासी कामगार खाड़ी देशों में काम करते हैं। सऊदी अरब के अलावा UAE, ओमान, कतर और कुवैत भी बांग्लादेश के लिए आर्थिक और रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में किसी एक सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनने से बांग्लादेश के दूसरे खाड़ी देशों के साथ संबंध प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। साथ ही इस गुट में शामिल होने से बांग्लादेश की चुनौती बढ़ जाएगी।
4. ईरान और होर्मुज स्ट्रेट की चुनौती
विशेषज्ञ ने होर्मुज स्ट्रेट को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। यह वैश्विक ऊर्जा और व्यापार के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। अगर बांग्लादेश किसी ऐसे सैन्य गठबंधन में शामिल होता है, जिससे ईरान के साथ तनाव बढ़े, तो उसके व्यापारिक और ऊर्जा हित प्रभावित हो सकते हैं। समुद्री मार्गों में किसी भी तरह की बाधा बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है।
5. युद्ध का आर्थिक बोझ बांग्लादेश पर पड़ेगा
विशेषज्ञ के अनुसार बांग्लादेश की मौजूदा आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए देश के लिए किसी सैन्य संघर्ष में शामिल होना बड़ा जोखिम हो सकता है। युद्ध की स्थिति में सीमित राष्ट्रीय संसाधनों को स्वास्थ्य, शिक्षा, विकास और सार्वजनिक सेवाओं से हटाकर रक्षा खर्च की ओर मोड़ना पड़ सकता है। इसका सीधा असर आम लोगों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
बांग्लादेश के लिए राष्ट्रीय हित सबसे अहम
मो. शरीफुल इस्लाम का तर्क है कि बांग्लादेश को किसी भी सैन्य समझौते में शामिल होने से पहले यह देखना चाहिए कि उससे देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को वास्तविक लाभ होगा या नहीं। भारत के साथ मतभेदों को लेकर भी उन्होंने सैन्य विकल्प के बजाय बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही है। ऐसे में ‘मक्का पैक्ट’ को लेकर बांग्लादेश में आने वाले दिनों में बहस और तेज होने की संभावना है।




