नई दिल्ली/वॉशिंगटन, 19 अगस्त 2026 : भारत में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी बहस के बीच अमेरिका में भी वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता की पुष्टि का मुद्दा खासा चर्चा में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनावी प्रक्रिया में बदलाव के लिए SAVE America Act का समर्थन कर रहे हैं। इस प्रस्ताव का मकसद संघीय चुनावों में मतदाता पंजीकरण के दौरान अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण सुनिश्चित करना और मतदाता पहचान प्रक्रिया को मजबूत करना है। हालांकि, अमेरिका में प्रस्तावित प्रक्रिया को भारत के SIR की हूबहू नकल कहना सही नहीं होगा। दोनों देशों में मतदाता रिकॉर्ड की जांच और पात्र मतदाताओं की पहचान को लेकर समानता जरूर दिखती है, लेकिन इनके कानूनी प्रावधान और प्रक्रिया अलग-अलग हैं।
ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था का दिया उदाहरण
ट्रंप भारतीय चुनाव व्यवस्था की पारदर्शिता और मतदाता पहचान प्रणाली की चर्चा कर चुके हैं। अब अमेरिका में भी वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता संबंधी जानकारी के मिलान को लेकर उनका जोर बढ़ा है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी प्रशासन 2020 के चुनाव से जुड़े मतदाता रिकॉर्ड की नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड से तुलना कर रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कुछ रिकॉर्ड में कथित तौर पर गैर-अमेरिकी नागरिकों के नाम होने का दावा भी किया है। हालांकि, ऐसे आंकड़ों को अपने आप में 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। यह भी स्पष्ट नहीं है कि जिन रिकॉर्ड का ट्रंप ने उल्लेख किया, उनमें शामिल लोगों ने वास्तव में मतदान किया था या नहीं।
भारत के SIR से कितनी मिलती है अमेरिका की प्रक्रिया ?
भारत में SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, पात्र मतदाताओं की पहचान करना और अपात्र या गलत प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया को मजबूत करना है। वहीं अमेरिका में ट्रंप जिस व्यवस्था की वकालत कर रहे हैं, उसका मुख्य फोकस मतदाता पंजीकरण के दौरान नागरिकता की पुष्टि और चुनावी पात्रता सुनिश्चित करने पर है। इसलिए दोनों प्रक्रियाओं में मतदाता रिकॉर्ड की जांच का पहलू समान नजर आता है, लेकिन इसे एक जैसी प्रक्रिया कहना उचित नहीं होगा।
क्या है SAVE America Act ?
SAVE America Act के तहत संघीय चुनावों में मतदाता के तौर पर पंजीकरण के लिए अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण देने की व्यवस्था प्रस्तावित है। ट्रंप और उनके समर्थक इसे चुनावी पारदर्शिता और सुरक्षा से जोड़ रहे हैं। वहीं, इसके आलोचकों का तर्क है कि मतदाता रिकॉर्ड में डेटा संबंधी गलतियां हो सकती हैं और कड़े दस्तावेजी नियम योग्य मतदाताओं के लिए पंजीकरण को मुश्किल बना सकते हैं।
चुनावी पारदर्शिता पर बढ़ी बहस
भारत और अमेरिका दोनों देशों में मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। भारत में SIR के जरिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर चर्चा है, जबकि अमेरिका में नागरिकता की पुष्टि और वोटर रजिस्ट्रेशन नियमों को लेकर बहस जारी है।हालांकि भारत का SIR और अमेरिका का SAVE America Act अलग-अलग कानूनी ढांचे के तहत काम करते हैं, इसलिए दोनों की तुलना करते समय इन अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।




