इस्लामाबाद, 19 अगस्त 2026 : पाकिस्तान के राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व देश के लिए 10 साल की राष्ट्रीय योजना पर काम कर रहा है, जिसमें आर्थिक सुधारों के साथ बड़े संवैधानिक बदलावों पर भी विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं तो पाकिस्तान की मौजूदा संसदीय व्यवस्था की जगह राष्ट्रपति शासन प्रणाली लाने की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं। इसके अलावा नए प्रांत और प्रशासनिक इकाइयां बनाने तथा केंद्र व प्रांतों के बीच वित्तीय संसाधनों के बंटवारे में बदलाव का प्रस्ताव भी चर्चा में है।
सरकार के बराबर भूमिका चाहती है सेना ?
रिपोर्ट के मुताबिक योजना में सेना को सरकारी फैसलों में अधिक और औपचारिक भूमिका देने की बात सामने आई है। पाकिस्तान में सेना का राजनीतिक मामलों में लंबे समय से प्रभाव रहा है और देश में कई बार सैन्य शासन रह चुका है। नई व्यवस्था का संभावित उद्देश्य सेना की भूमिका को केवल सुरक्षा और रक्षा मामलों तक सीमित रखने के बजाय शासन के बड़े फैसलों में प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। हालांकि इन प्रस्तावों को लेकर अभी अंतिम संवैधानिक फैसला सामने नहीं आया है।
संसदीय व्यवस्था की जगह राष्ट्रपति प्रणाली ?
प्रस्तावित योजना का सबसे बड़ा पहलू पाकिस्तान की शासन प्रणाली में बदलाव बताया जा रहा है। इसके तहत संसदीय मॉडल की जगह ऐसी राष्ट्रपति प्रणाली पर विचार किया जा रहा है, जिसमें राष्ट्रपति के पास अपेक्षाकृत ज्यादा अधिकार हों। रिपोर्ट के अनुसार इस मॉडल को तुर्की व मिस्र जैसी व्यवस्थाओं से प्रेरित बताया जा रहा है। समर्थकों का तर्क है कि मजबूत राष्ट्रपति के जरिए बड़े फैसले तेजी से लिए जा सकते हैं। हालांकि पाकिस्तान में राष्ट्रपति प्रणाली लागू करने के लिए संविधान में बड़े बदलाव करने होंगे। ऐसे किसी कदम को राजनीतिक दलों की ओर से विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है।
क्या पाकिस्तान में नए प्रांत बनेंगे ?
योजना में नए प्रांत और प्रशासनिक इकाइयां बनाने पर भी विचार की बात सामने आई है। इसके लिए संभावित 28वें संविधान संशोधन का रास्ता अपनाए जाने की चर्चा है। हालांकि नए प्रांतों के गठन को लेकर अभी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
10 साल का आर्थिक रोडमैप भी चर्चा में
सैन्य नेतृत्व की प्रस्तावित योजना में केवल राजनीतिक बदलाव ही नहीं, बल्कि आर्थिक सुधार भी शामिल बताए जा रहे हैं। पाकिस्तान निवेश, खनिज, खनन, रक्षा उद्योग और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक आर्थिक रोडमैप पर भी काम कर रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति प्रणाली, नए प्रांत और सेना की बढ़ी हुई भूमिका जैसे प्रस्ताव फिलहाल रिपोर्टों और चर्चाओं पर आधारित हैं। इन्हें लागू करने के लिए पाकिस्तान की संसद और संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरना होगा।




