मैड्रिड, 13 अगस्त 2026 : 12 अगस्त 2026 को यूरोप के कई हिस्सों में एक दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिली। करीब 27 साल बाद यूरोप की मुख्य भूमि के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई दिया। सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ इलाकों में दिन के समय अचानक अंधेरा छा गया और आसमान का नजारा बेहद अद्भुत नजर आया। पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा खासतौर पर उत्तरी स्पेन, आइसलैंड और ग्रीनलैंड के कुछ हिस्सों में देखा गया। इसके अलावा यूरोप, उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई दिया।
कैसे लगता है सूर्य ग्रहण ?
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। ऐसी स्थिति में चंद्रमा सूर्य की चमकदार डिस्क के सामने आकर उसे कुछ समय के लिए ढक देता है। जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है, तो इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जाता है। पूर्णता के दौरान सूर्य की चमकदार सतह छिप गई और उसके आसपास मौजूद बाहरी वायुमंडलीय परत यानी कोरोना दिखाई देने लगी। इसी वजह से आसमान में कुछ समय के लिए रात जैसा अंधेरा नजर आया।
दो मिनट 18 सेकंड तक रहा पूर्ण ग्रहण
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रहण अपने चरम पर करीब दो मिनट 18 सेकंड तक पूर्ण अवस्था में रहा। इस दौरान सूर्य पूरी तरह चंद्रमा के पीछे छिपा नजर आया। खगोलीय घटना ने वैज्ञानिकों के साथ-साथ फोटोग्राफरों और अंतरिक्ष में रुचि रखने वाले लोगों का भी ध्यान खींचा। पूर्ण सूर्य ग्रहण वैज्ञानिकों के लिए सूर्य के बाहरी वातावरण का अध्ययन करने का महत्वपूर्ण अवसर भी माना जाता है।
1999 के बाद यूरोप में ऐसा नजारा
यूरोप की मुख्य भूमि पर इससे पहले पूर्ण सूर्य ग्रहण 1999 में देखा गया था। ऐसे में करीब 27 साल बाद पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देने के कारण इस घटना को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहा। स्पेन में ग्रहण को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। स्थानीय अधिकारियों के अनुमान के अनुसार, करीब 60 लाख लोगों ने ग्रहण देखने के लिए अलग-अलग स्थानों का रुख किया।
भारत में नहीं दिखाई दिया पूर्ण सूर्य ग्रहण
इस सूर्य ग्रहण का नजारा भारत में नहीं देखा जा सका। जिस समय यूरोप के कुछ हिस्सों में सूर्य ग्रहण हो रहा था, उस समय भारतीय उपमहाद्वीप में रात थी। भारत ग्रहण की पूर्णता वाले क्षेत्र के बाहर था। यही वजह है कि भारत में लोगों को इस दुर्लभ खगोलीय घटना को सीधे देखने का मौका नहीं मिला, जबकि यूरोप के कई हिस्सों में लोगों ने दिन के समय आसमान में बदलता नजारा देखा।




