पटना | 8 जुलाई 2026

बिहार सरकार ने राज्य को पूर्वी भारत का प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बिहार MSME नीति-2026 का प्रारूप (ड्राफ्ट) जारी कर दिया है। नई नीति का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में एक करोड़ MSME इकाइयों का पंजीकरण और एक करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करना है। इसके साथ ही 500 MSME इकाइयों को वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ने की भी योजना बनाई गई है। उद्योग विभाग ने मसौदे पर आम लोगों और उद्योग जगत से 15 दिनों के भीतर सुझाव आमंत्रित किए हैं।

हर जिले में बनेंगे MSME पार्क

नई नीति के तहत राज्य के प्रत्येक जिले में नैनो और मेगा MSME पार्क विकसित किए जाएंगे। 10 से 20 एकड़ भूमि पर नैनो पार्क और 20 एकड़ से अधिक क्षेत्र में मेगा पार्क स्थापित होंगे। इसके अलावा कॉमन फैसिलिटी सेंटर, हेरिटेज क्लस्टर, परीक्षण प्रयोगशालाएं और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक ढांचा भी विकसित किया जाएगा, जिससे नए उद्यमों को आसानी से कारोबार शुरू करने में मदद मिलेगी।

उद्यमियों को मिलेगा बड़ा आर्थिक प्रोत्साहन

सरकार निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पूंजी अनुदान की विशेष व्यवस्था लेकर आई है। ए श्रेणी के जिलों में 25 प्रतिशत और बी श्रेणी के जिलों में 30 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी दी जाएगी। सूक्ष्म उद्योगों को अधिकतम 25 लाख रुपये, लघु उद्योगों को 1.5 करोड़ रुपये और मध्यम उद्योगों को 5 करोड़ रुपये तक का अनुदान मिलेगा। महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा, अति पिछड़ा, दिव्यांग और मंगलामुखी उद्यमियों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजी अनुदान भी मिलेगा।

तकनीक, प्रशिक्षण और निर्यात पर विशेष जोर

नीति के तहत कोसी, भागलपुर, मुंगेर और पूर्णिया में चार टेक्नोलॉजी एवं एक्सटेंशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। हर वर्ष एक लाख उद्यमियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए एक्सपोर्ट सेल, खरीदार-विक्रेता सम्मेलन और ई-कॉमर्स नेटवर्क को भी मजबूत किया जाएगा।

डिजिटल सुविधा और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

प्रत्येक जिला उद्योग केंद्र में MSME केंद्र, प्रखंड स्तर पर MSME मित्र और पंचायत स्तर पर उद्योग सलाहकार नियुक्त किए जाएंगे। साथ ही डिजिटल पोर्टल, मोबाइल ऐप, चैटबॉट और हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। नई इकाइयों को पहले तीन वर्षों तक कर्मचारियों के EPF अंशदान की प्रतिपूर्ति, बिजली शुल्क पर 20 प्रतिशत अनुदान, 100 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी रिफंड, 50 प्रतिशत SGST प्रतिपूर्ति तथा निर्यात बढ़ाने के लिए प्रति वर्ष 20 लाख रुपये तक सहायता देने का भी प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि यह नीति बिहार को निवेश, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।