पटना | 08 जुलाई 2026
हर वर्ष मानसून के दौरान उत्तर बिहार के लाखों लोगों को बाढ़ की भीषण तबाही का सामना करना पड़ता है। ऐसे में राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से नदियों को जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना को बाढ़ और सिंचाई की समस्या के संभावित समाधान के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परियोजनाएं बाढ़ नियंत्रण से अधिक सिंचाई पर केंद्रित हैं।
हर साल बाढ़ से होती है भारी तबाही
नेपाल से निकलने वाली कोसी नदी को लंबे समय से "बिहार का शोक" कहा जाता है। मानसून के दौरान नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश होने पर सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और खगड़िया समेत कई जिले बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। वर्ष 2008 की कुसहा त्रासदी ने इस समस्या की गंभीरता को पूरे देश के सामने ला दिया था।
कोसी-मेची लिंक परियोजना पर जारी है काम
बाढ़ और जल प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने कोसी-मेची इंट्रा-स्टेट लिंक परियोजना को मंजूरी दी है। करीब 117.5 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का उद्देश्य कोसी नदी को महानंदा की सहायक मेची नदी से जोड़ना है। परियोजना पर 6,282 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है और इसे वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार के लगभग 2.10 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों ने जताई आशंका
बाढ़ एवं जल संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है कि परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों में इसका प्रमुख उद्देश्य सिंचाई बताया गया है। उनका मानना है कि कोसी जैसी विशाल नदी के लाखों क्यूसेक पानी की तुलना में इस परियोजना के जरिए सीमित मात्रा में ही पानी डायवर्ट किया जा सकेगा, जिससे बाढ़ की समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं दिखता।
सरकार का दावा, आगे बढ़ेगा नदी जोड़ो अभियान
जल संसाधन विभाग का कहना है कि कोसी-मेची परियोजना पर कार्य शुरू हो चुका है और भविष्य में बागमती-बूढ़ी गंडक सहित अन्य नदी जोड़ो परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी और कई इलाकों में जलभराव तथा बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए नदियों के प्राकृतिक प्रवाह, पुरानी धाराओं के पुनर्जीवन और समग्र जल प्रबंधन पर भी समान रूप से काम करना होगा।




