पटना | 8 जुलाई 2026
बिहार में जमीन से जुड़े विवादों की सुनवाई की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब राज्य के सभी राजस्व न्यायालयों में किसी भी पक्षकार से ऑफलाइन या हाथों-हाथ कोई कागजी दस्तावेज स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग के सचिव जय सिंह ने इस संबंध में राज्य के सभी जिलाधिकारियों, अपर समाहर्ताओं (ADM), भूमि सुधार उप समाहर्ताओं (DCLR) और अंचल अधिकारियों (CO) को निर्देश जारी कर दिए हैं।
RCMS पोर्टल से होगी पूरी सुनवाई
विभाग के अनुसार अब जमीन विवाद से जुड़े सभी दस्तावेज, साक्ष्य और आवश्यक रिकॉर्ड केवल राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (RCMS) पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे। न्यायालय भी केवल पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटल दस्तावेजों के आधार पर ही मामलों की सुनवाई और निर्णय करेंगे। इससे पूरी न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनेगी।
ऑफलाइन दस्तावेज लेने पर सख्ती
राजस्व विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि RCMS लागू होने के बावजूद कई अधिकारी अभी भी पक्षकारों से सीधे कागजी दस्तावेज ले रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर ऑफलाइन दस्तावेज स्वीकार करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सभी अधिकारियों को इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
जरूरत पड़ने पर भी ऑनलाइन ही जमा होंगे दस्तावेज
यदि किसी मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त साक्ष्य या दस्तावेज की आवश्यकता होगी, तो संबंधित न्यायालय पक्षकार को केवल RCMS पोर्टल पर ही उसे अपलोड करने का निर्देश देगा। किसी भी परिस्थिति में दस्तावेजों की हार्ड कॉपी स्वीकार नहीं की जाएगी। इससे रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और दस्तावेजों में छेड़छाड़ या गुम होने की संभावना भी समाप्त होगी।
आम लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सभी दस्तावेज ऑनलाइन जमा होने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी। साथ ही, डिजिटल रिकॉर्ड हमेशा सुरक्षित रहेंगे, जिससे भविष्य में दस्तावेज उपलब्ध कराने में भी आसानी होगी।
पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी व्यवस्था
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य राजस्व न्यायालयों को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी स्तर पर ऑफलाइन दस्तावेज स्वीकार न किए जाएं। सरकार का लक्ष्य आम लोगों को तेज, सरल और भरोसेमंद न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है।




