नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी को बीते कई साल हो चुके हैं, लेकिन उसके बाद लोगों की सेहत को लेकर सामने आ रहे आंकड़े कई नए सवाल खड़े कर रहे हैं। हालिया स्वास्थ्य सर्वेक्षण में एक ऐसा ट्रेंड सामने आया है, जिसने विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2024 के बीच देश में मधुमेह (डायबिटीज) से प्रभावित लोगों की संख्या में करीब 6 करोड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 15 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में यह संख्या 8.7 करोड़ से बढ़कर 11.7 करोड़ तक पहुंच गई, जबकि महिलाओं में मरीजों की संख्या 5.4 करोड़ से बढ़कर 7.12 करोड़ हो गई।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, शारीरिक गतिविधियों में कमी और खानपान की खराब आदतें इस बढ़ोतरी की प्रमुख वजह हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी का खतरा और बढ़ जाता है।
चिकित्सकों की सलाह है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार और सक्रिय दिनचर्या को अपनाकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि बढ़ते मामलों का यह सिलसिला आखिर कहां जाकर रुकेगा। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो आने वाले वर्षों में डायबिटीज देश के सामने और बड़ी चुनौती बन सकती है।





