नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026
हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis B) ऐसी बीमारी है जो लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है। समय पर जांच और इलाज न मिलने पर यह सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा में हेपेटाइटिस-बी को प्रभावी दवाओं से नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि हेपेटाइटिस-सी के अधिकांश मरीज तीन महीने की दवा से पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।
भारत में करोड़ों लोग हैं प्रभावित
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया में लगभग 25.4 करोड़ लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस-बी और 5 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं। भारत उन देशों में शामिल है जहां इस बीमारी का बोझ सबसे अधिक है। अनुमान के मुताबिक देश में करीब 4 करोड़ लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस-बी और 60 लाख से 1.2 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-सी से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में संक्रमित लोगों की समय पर पहचान और इलाज नहीं हो पाता।
लिवर शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग
एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. प्रमोद गर्ग के अनुसार, लिवर शरीर में 500 से अधिक महत्वपूर्ण कार्य करता है। यह पाचन, मेटाबॉलिज्म, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। लिवर में सूजन को हेपेटाइटिस कहा जाता है, जो अल्पकालिक (Acute) या दीर्घकालिक (Chronic) हो सकता है।
हेपेटाइटिस-बी और सी कैसे फैलता है?
विशेषज्ञों के अनुसार हेपेटाइटिस-बी और सी मुख्य रूप से इन कारणों से फैलते हैं—
- संक्रमित खून के संपर्क में आने से
- असुरक्षित या संक्रमित सुई के इस्तेमाल से
- असुरक्षित यौन संबंध बनाने से
- संक्रमित मां से नवजात शिशु में
वहीं, हेपेटाइटिस-ए और ई मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी के जरिए फैलते हैं।
क्या हेपेटाइटिस-बी पूरी तरह ठीक हो सकता है?
एम्स के विशेषज्ञ प्रो. शालीमार के अनुसार, आज हेपेटाइटिस-बी के इलाज में काफी प्रगति हुई है। इस बीमारी को लंबी अवधि तक दी जाने वाली एंटीवायरल दवाओं से प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं, हेपेटाइटिस-सी के 95 प्रतिशत से अधिक मरीज तीन महीने की दवा से पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।
हालांकि, यदि बीमारी का पता काफी देर से चलता है और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंच चुका होता है, तो कुछ मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता भी पड़ सकती है।
ये लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं
एक्यूट हेपेटाइटिस में मरीज को निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं—
- पीलिया
- मतली और उल्टी
- भूख कम लगना
- अत्यधिक कमजोरी
- पेट में दर्द
विशेषज्ञों के मुताबिक, कई मामलों में क्रोनिक हेपेटाइटिस वर्षों तक बिना किसी लक्षण के बढ़ता रहता है। इसलिए जोखिम वाले लोगों को नियमित जांच करानी चाहिए।
फैटी लिवर भी बन रहा बड़ा खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि अब सिर्फ वायरस ही नहीं, बल्कि मोटापा, डायबिटीज, गलत खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी और अत्यधिक शराब का सेवन भी लिवर की बीमारियों का बड़ा कारण बन रहा है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार भारत में लगभग 38% वयस्क और 35% बच्चे फैटी लिवर की समस्या से प्रभावित हैं।




