जयपुर | 22 जुलाई 2026

राजस्थान के जयपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (NIMS) यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है। वर्ष 2010 में एमबीबीएस में दाखिला लेने वाला छात्र 14 साल बाद भी अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सका। कई अवसर मिलने के बावजूद परीक्षा पास नहीं करने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने उसे आगे परीक्षा देने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। अदालत के फैसले के साथ ही छात्र का डॉक्टर बनने का सपना फिलहाल टूट गया।

अंतिम मौका मिलने के बाद भी नहीं कर सका परीक्षा पास

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि छात्र को पहले भी कई मौके दिए जा चुके थे। इससे पहले एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने 30 जनवरी 2024 को अंतिम अवसर देने का निर्देश दिया था। लेकिन छात्र इस परीक्षा में भी सफल नहीं हो सका। उसकी उत्तरपुस्तिका सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश की गई, जिसके बाद अदालत ने पूरे मामले पर अंतिम फैसला सुनाया।

कोर्ट ने मरीजों की सुरक्षा को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता

जस्टिस अरुण मोंगा की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि मेडिकल शिक्षा किसी सामान्य डिग्री की तरह नहीं है। डॉक्टर का पेशा सीधे मरीजों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। ऐसे में केवल सहानुभूति, समय या आर्थिक नुकसान के आधार पर किसी छात्र को मेडिकल डिग्री देने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि डॉक्टर बनने के लिए निर्धारित शैक्षणिक मानकों को पूरा करना अनिवार्य है।

छात्र की अपील खारिज

छात्र की ओर से अधिवक्ता शेख तारिक ने अदालत से अनुरोध किया था कि उसे शेष परीक्षाओं में बैठने का एक और अवसर दिया जाए। हालांकि अदालत ने इस मांग को अस्वीकार करते हुए कहा कि बार-बार अवसर देने से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और सार्वजनिक हित प्रभावित हो सकता है।

अदालत की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चिकित्सा शिक्षा में किसी भी प्रकार का समझौता समाज और मरीजों की सुरक्षा के साथ समझौता होगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मेडिकल डिग्री उसी छात्र को मिलनी चाहिए, जिसने सभी निर्धारित शैक्षणिक मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया हो। अदालत के अनुसार, सार्वजनिक स्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा किसी भी व्यक्तिगत सहानुभूति से अधिक महत्वपूर्ण है।