ICMR, WHO और हृदय विशेषज्ञों की चेतावनी- कम उम्र में बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामलों के पीछे कई गंभीर कारण

कुछ साल पहले तक हार्ट अटैक को 50-60 वर्ष की उम्र के लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 20 से 30 साल के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत में कम उम्र में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हृदय रोग दुनिया में हर साल करीब 1.79 करोड़ लोगों की मौत का कारण बनते हैं। इनमें से अधिकांश मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण होती हैं। भारत में भी हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं और कई रिपोर्टों के अनुसार भारतीयों में दिल की बीमारी का खतरा पश्चिमी देशों के लोगों की तुलना में लगभग 10 साल पहले शुरू हो सकता है।

इंडियन हार्ट एसोसिएशन और विभिन्न मेडिकल अध्ययनों के अनुसार, भारत में होने वाले हार्ट अटैक के मामलों में करीब 50% मरीज 50 वर्ष से कम उम्र के होते हैं, जबकि लगभग 25% मामले 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में देखे जाते हैं। यही वजह है कि युवाओं में हार्ट हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हैं। लगातार बढ़ता तनाव, लंबे समय तक बैठकर काम करना, जंक फूड का अधिक सेवन, धूम्रपान, शराब, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज प्रमुख जोखिम कारक हैं। भारत में ICMR के आंकड़ों के अनुसार, गैर-संचारी रोगों से जुड़े जोखिम कारकों में मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता तेजी से बढ़ रही है।

एक अन्य चिंता की बात यह है कि कई युवा खुद को फिट मानते हैं, लेकिन नियमित हेल्थ चेकअप नहीं कराते। हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और आनुवंशिक हृदय रोग जैसी समस्याएं लंबे समय तक बिना लक्षण के बनी रह सकती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, कई मामलों में हार्ट अटैक आने से पहले कोई स्पष्ट चेतावनी भी नहीं मिलती।

विशेषज्ञ बताते हैं कि सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम शारीरिक गतिविधि या 75 मिनट तेज व्यायाम हृदय रोग के खतरे को कम कर सकता है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और धूम्रपान से दूरी भी बेहद जरूरी है।