रांची | 21 जुलाई 2026
झारखंड के जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक सौंदर्य सिर्फ पर्यटन की पहचान नहीं हैं, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास का भी अहम हिस्सा रहे हैं। सत्यजीत राय, तपन सिन्हा, अपर्णा सेन और कोंकणा सेन शर्मा जैसे दिग्गज फिल्मकारों ने छोटानागपुर के प्राकृतिक परिवेश को अपनी फिल्मों में जीवंत रूप दिया। इन फिल्मों ने झारखंड को सिर्फ शूटिंग लोकेशन नहीं, बल्कि कहानी के एक महत्वपूर्ण पात्र के रूप में स्थापित किया।
सत्यजीत राय ने पलामू के जंगलों को बनाया फिल्म की आत्मा
वर्ष 1969 में सत्यजीत राय ने अपनी चर्चित फिल्म 'अरण्येर दिनरात्रि' की शूटिंग पलामू के केचकी संगम और बेतला के जंगलों में की। फिल्म में जंगल केवल प्राकृतिक पृष्ठभूमि नहीं, बल्कि पात्रों के भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष का प्रतीक बनकर उभरा।
हेमेन गांगुली और बंशी चंद्रगुप्ता का अहम योगदान
निर्माता हेमेन गांगुली ने रांची को पूर्वी भारत के प्रमुख फिल्म केंद्र के रूप में पहचान दिलाई। वहीं रांची में जन्मे प्रसिद्ध आर्ट डायरेक्टर बंशी चंद्रगुप्ता ने 'पाथेर पांचाली', 'चारुलता' और 'अरण्येर दिनरात्रि' जैसी कालजयी फिल्मों की दृश्य-भाषा को नई ऊंचाई दी।
मैक्लुस्कीगंज और रांची बने कई चर्चित फिल्मों की लोकेशन
अपर्णा सेन की 'परमितार एक दिन', कोंकणा सेन शर्मा की 'ए डेथ इन द गंज' और तपन सिन्हा की 'एक डॉक्टर की मौत' जैसी फिल्मों की शूटिंग भी झारखंड में हुई। इन फिल्मों ने यहां की संस्कृति, प्रकृति और सामाजिक परिवेश को देश-दुनिया के दर्शकों तक पहुंचाया। भारतीय सिनेमा में झारखंड का योगदान आज भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।




