रांची | 14 जुलाई 2026
8 करोड़ की परियोजना हुई बंद, स्मार्ट सिटी मॉडल पर उठे सवाल
झारखंड की राजधानी रांची में वर्ष 2019 में बड़े सपनों और आधुनिक शहरी परिवहन की सोच के साथ शुरू की गई पब्लिक साइकिल शेयरिंग सिस्टम (Public Bicycle Sharing System - PBSS) अब पूरी तरह बंद हो गई है। करीब 8 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई यह परियोजना लोगों को सस्ता, पर्यावरण अनुकूल और सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाई गई थी। लेकिन संचालन में आई समस्याओं, रखरखाव की कमी और प्रशासनिक अड़चनों के चलते यह योजना अब इतिहास बन गई है।
1200 स्मार्ट साइकिलों का सपना अधूरा रह गया
मार्च 2019 में शुरू हुई इस परियोजना के तहत शहर के विभिन्न हिस्सों में 1200 स्मार्ट साइकिलें और लगभग 60 साइकिल स्टैंड बनाए गए थे। शुरुआती दिनों में छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और युवाओं ने इसका अच्छा उपयोग किया। लोग मोबाइल ऐप के जरिए साइकिल लेकर शहर में यात्रा करते थे, लेकिन समय के साथ उपयोगकर्ताओं की संख्या लगातार घटती गई।
कोविड, चोरी और रखरखाव की कमी बनी बड़ी वजह
कोरोना महामारी के बाद इस सेवा की स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। कई साइकिलें खराब हो गईं, अनेक साइकिलें चोरी हो गईं, जबकि कई के पार्ट्स निकाल लिए गए। समय पर मरम्मत नहीं होने और तकनीकी दिक्कतों के कारण बड़ी संख्या में साइकिलें गोदामों में बेकार पड़ी रहीं। मोबाइल ऐप में आने वाली समस्याओं और सुरक्षित साइकिल ट्रैक की कमी ने भी लोगों का भरोसा कम कर दिया।
भुगतान विवाद के बाद ऑपरेटर ने बंद किया संचालन
इस परियोजना का संचालन चार्टर्ड स्पीड कंपनी कर रही थी। अप्रैल 2025 में कंपनी के साथ हुए अनुबंध की अवधि समाप्त हो गई। कंपनी ने लगभग एक वर्ष तक अतिरिक्त अवधि में सेवा जारी रखी, लेकिन राज्य सरकार की ओर से नया अनुबंध या अवधि विस्तार नहीं मिलने पर उसने संचालन बंद कर दिया। इसके साथ ही पूरे शहर में पब्लिक साइकिल शेयरिंग सेवा पूरी तरह ठप हो गई।
स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन ने क्या कहा?
रांची स्मार्ट सिटी कॉरपोरेशन के महाप्रबंधक राकेश नंदकुलियार ने बताया कि ऑपरेटर कंपनी को अवधि विस्तार नहीं दिया गया, इसलिए सेवा बंद करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि भविष्य में शहर में साइकिल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाओं पर काम किया जाएगा।
वीरान पड़े साइकिल स्टैंड, लोगों में नाराजगी
आज कचहरी चौक, मोरहाबादी, हिनू, अरगोड़ा समेत कई इलाकों में बने साइकिल स्टैंड खाली पड़े हैं। जिन साइकिलों को शहर की आधुनिक पहचान बनाया जाना था, वे अब या तो कबाड़ बन चुकी हैं या गायब हो चुकी हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद योजना का बंद होना स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। इससे पर्यावरण संरक्षण, ट्रैफिक नियंत्रण और सस्ती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का उद्देश्य भी अधूरा रह गया।




