सरायकेला | 20 जुलाई 2026

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने राज्य सरकार पर पेसा नियमावली को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड में पेसा नियमावली के नाम पर आदिवासी समाज को ठगा जा रहा है और ग्राम सभाओं के अधिकारों को कमजोर किया गया है। रविवार को सरायकेला के कांड्रा स्थित फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में आयोजित बैठक में उन्होंने यह बातें कहीं। यह बैठक 9 अगस्त को मनाए जाने वाले विश्व आदिवासी दिवस की तैयारियों की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी।

'अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है आदिवासी समाज'

बैठक को संबोधित करते हुए चम्पाई सोरेन ने कहा कि झारखंड का आदिवासी समाज आज धर्मांतरण, घुसपैठ और अपनी पहचान के संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है, सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और महिलाओं की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि पाकुड़ समेत राज्य के कई जिलों में आदिवासी समाज अब अल्पसंख्यक होता जा रहा है।

'ग्राम सभाओं के अधिकार सीमित किए गए'

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पेसा नियमावली में ग्राम सभा की शक्तियों को कमजोर किया गया है। उनके अनुसार, नियमावली में 'अनुमति' की जगह 'सहमति' और '30 दिनों में स्वतः स्वीकृति' जैसे प्रावधान जोड़कर भ्रम की स्थिति पैदा की गई है। उन्होंने कहा कि यदि ग्राम सभा 30 दिनों के भीतर किसी प्रस्ताव पर निर्णय नहीं लेती, तो उसे स्वतः स्वीकृत मान लिया जाता है। ऐसे में ग्राम सभा की वास्तविक भूमिका और अधिकार प्रभावित होते हैं।

'बालू और तालाबों पर भी नहीं मिला अधिकार'

चम्पाई सोरेन ने कहा कि यदि ग्राम सभाओं को अपने घाटों के बालू और तालाबों की मछलियों पर भी अधिकार नहीं मिल पा रहा है, तो पेसा कानून का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी है।

9 अगस्त को होगा व्यापक मंथन

बैठक में तय किया गया कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर 9 अगस्त को बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान आदिवासी समाज के अधिकार, पेसा कानून, जल-जंगल-जमीन और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक में आदिवासी सांवता सुसार अखाड़ा के संयोजक रामदास टुडू सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि और पारंपरिक ग्राम प्रधान मौजूद रहे।