रांची | 25 जुलाई 2026
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हाल के दिनों में JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर हुई कार्रवाई और CID जांच के बीच अब पुरानी CBI जांच रिपोर्ट भी सुर्खियों में आ गई है। जानकारी के अनुसार, CBI ने लगभग दो वर्ष पहले इस मामले में अपनी जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी, लेकिन अब तक ट्रायल शुरू नहीं हो सका है। इससे करीब 20 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों में निराशा बढ़ गई है।
60 लोगों पर लगाए गए गंभीर आरोप
CBI की चार्जशीट में कुल 60 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें तत्कालीन JPSC अध्यक्ष, आयोग के सदस्य, परीक्षा नियंत्रक, मूल्यांकनकर्ता, इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य, समन्वयक और कई चयनित अभ्यर्थियों के नाम शामिल बताए गए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा और इंटरव्यू के दौरान अंकों में कथित हेरफेर कर कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप
जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ बोर्ड सदस्यों और अधिकारियों ने अपने परिजनों एवं करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए मूल्यांकन और इंटरव्यू प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया। आरोप यह भी है कि कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं के अंक बढ़ाए गए, इंटरव्यू मार्क्स में बदलाव किया गया और ओएमआर शीट के अंकों में भी कथित गड़बड़ी की गई।
ट्रायल शुरू होने का इंतजार
CBI ने अदालत को कई दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं। हालांकि, चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी मुकदमे की सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है। अब अभ्यर्थियों और संबंधित पक्षों की नजर अदालत की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। इस बीच हालिया JPSC विवादों ने एक बार फिर आयोग की पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।




