धनबाद | 21 जुलाई 2026

झारखंड के जननेता, पूर्व सांसद और पूर्व विधायक स्वर्गीय ए.के. राय की सातवीं पुण्यतिथि पर मंगलवार को धनबाद में श्रद्धा और सम्मान का भावनात्मक माहौल देखने को मिला। नूतनडीह मोड़ स्थित केंद्रीय अस्पताल परिसर के समीप स्थापित उनकी प्रतिमा पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आम लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि ए.के. राय का संघर्ष, सादगी और जनसेवा का जीवन आज भी समाज और राजनीति के लिए प्रेरणास्रोत है।

प्रतिमा पर माल्यार्पण, दो मिनट का मौन

एके राय स्मारक समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। निरसा विधायक अरूप चटर्जी, टुंडी विधायक मथुरा महतो, कांग्रेस नेता वैभव सिन्हा, समिति अध्यक्ष हरिप्रसाद पप्पू समेत कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता को नमन किया और उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

'एक नेता नहीं, एक विचारधारा थे ए.के. राय'

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि ए.के. राय केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन मजदूरों, किसानों, आदिवासियों और समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। टुंडी विधायक मथुरा महतो ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि समाज की सेवा होना चाहिए और ए.के. राय इसका जीवंत उदाहरण हैं।

नई पीढ़ी तक पहुंचाने का लिया संकल्प

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को ए.के. राय के सिद्धांतों, ईमानदारी और संघर्ष से परिचित कराना समय की जरूरत है। उन्होंने स्वदेशी, सामाजिक न्याय और श्रमिक अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। नेताओं ने कहा कि उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।

सादगी और जनसेवा की मिसाल

सभा में मौजूद लोगों ने याद किया कि सांसद और विधायक रहने के बावजूद ए.के. राय ने कभी सरकारी बंगला, वाहन या अन्य विशेष सुविधाएं स्वीकार नहीं कीं। उन्होंने हमेशा आम नागरिक की तरह जीवन बिताया और जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष किया। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान दौर की राजनीति में उनका जीवन जनप्रतिनिधियों के लिए आदर्श है।

मजदूरों और किसानों की मजबूत आवाज

ए.के. राय को कोयलांचल क्षेत्र के मजदूरों और किसानों की सबसे बुलंद आवाज माना जाता है। उन्होंने विस्थापन, श्रमिक अधिकार, सामाजिक न्याय और आदिवासी हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया। यही वजह है कि धनबाद ही नहीं, पूरे झारखंड में उन्हें आज भी जननायक के रूप में याद किया जाता है।

आज भी जीवित है उनकी विरासत

गौरतलब है कि 21 जुलाई 2019 को धनबाद के केंद्रीय अस्पताल में ए.के. राय का निधन हुआ था। वे तीन बार धनबाद से सांसद और तीन बार विधायक रहे। उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में सादगी, ईमानदारी और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि ए.के. राय की विचारधारा और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।